उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके से सोमवार (22 जून) को एक बेहद दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक व्यावसायिक इमारत में अचानक इतनी भीषण आग लग गई कि पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सबसे पहले नीचे ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक दुकान में लगी थी, जिसने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। बेहद दुर्भाग्य की बात यह रही कि जिस इमारत में आग लगी, उसी की ऊपरी मंजिल पर एक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था। आग की लपटें और जहरीला धुआं इतनी तेजी से ऊपर की ओर फैला कि कोचिंग के अंदर मौजूद मासूम बच्चों को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों ने जान की परवाह न करते हुए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचित किया, लेकिन तब तक यह हादसा कई जिंदगियों को लील चुका था।
अलीगढ़ का दौरा छोड़ लखनऊ रवाना हुए मुख्यमंत्री, दोषियों पर गिरेगी गाज
इस दर्दनाक हादसे की खबर जैसे ही प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को मिली, वह बेहद भावुक और स्तब्ध रह गए। मुख्यमंत्री उस समय अलीगढ़ में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अपना दौरा तुरंत बीच में ही रद्द कर दिया। सीएम योगी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “मेरी हार्दिक इच्छा थी कि आज मैं अलीगढ़ में आपके बीच रहूं, लेकिन मुझे अत्यंत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि लखनऊ में एक बेहद दुखद अग्निकांड हुआ है, जिसमें कुछ मासूम बच्चों की जान चली गई है।” उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और स्पष्ट किया कि वह खुद तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हो रहे हैं ताकि स्थिति का जायजा ले सकें। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि इस लापरवाही के पीछे जो भी दोषी होगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
DGP और ACS गृह को मिले सख्त निर्देश, मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) और अपर मुख्य सचिव (गृह) को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने और पूरे मामले की बारीकी से जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं। शासन के इन शीर्ष अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे इस अग्निकांड के कारणों का पता लगाकर जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करें। प्रशासन की टीमें इस बात की जांच में जुट गई हैं कि क्या उस व्यावसायिक इमारत और कोचिंग सेंटर में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम (Fire Safety Measures) थे या नहीं। क्या वहां कोई इमरजेंसी एग्जिट था? इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
चीखों से गूंजा इलाका, अपनों को खोकर टूटे परिजन
इस भयंकर हादसे के बाद से पूरे पुरनिया और अलीगंज इलाके में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों और फायर ब्रिगेड की मदद से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। लेकिन जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया, वहां सिर्फ और सिर्फ चीखें और आंसू ही बचे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। लोग इस बात से भी आक्रोशित हैं कि रिहायशी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के ऐसे कोचिंग सेंटर कैसे चल रहे थे। फिलहाल, राहत कार्य पूरे कर लिए गए हैं, लेकिन इस अग्निकांड ने पूरी व्यवस्था और मासूमों की सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है।








