राम मंदिर दान घोटाला: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI से कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दानराशि की कथित हेराफेरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर जा पहुंचा है। इस पूरे विवाद ने न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी झकझोर कर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अनूप अवस्थी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक पत्र याचिका भेजी है। इस याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान ले और अपनी निगरानी में एक निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच के आदेश जारी करे। याचिकाकर्ता का कहना है कि लोगों के भरोसे को कायम रखने के लिए तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

सियासी अखाड़ा बनी अयोध्या: एसआईटी पर घमासान और ट्रस्टियों को हटाने की मांग

राम मंदिर के चंदे में गड़बड़ी के आरोपों के बाद यूपी का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराते हुए इसका स्वागत किया है। लेकिन विपक्षी दल इस सरकारी जांच से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने सीधे तौर पर राज्य सरकार की SIT पर अविश्वास जताया है। उन्होंने मांग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के जजों की निगरानी में जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक राम मंदिर ट्रस्ट के सभी मौजूदा सदस्यों को उनके पदों से हटा दिया जाए, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

आंदोलन के पुरोधाओं का दर्द: ‘बलिदान से बने मंदिर में चोरी बर्दाश्त नहीं’

इस पूरे विवाद पर राम मंदिर आंदोलन के कद्दावर नेता और पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि मंदिर के लिए लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मंदिर के लिए अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी और कई नेता जेल गए थे। ऐसे पवित्र स्थान पर चोरी का आरोप लगना बेहद चिंताजनक है और इसकी तह तक जाना जरूरी है। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने अयोध्या के सर्किट हाउस में डेरा डाल दिया है। इस टीम में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं, जो सोमवार सुबह से ही कागजातों को खंगालने में जुट गए हैं।

जांच शुरू होते ही बढ़ी हलचल: महासचिव चंपत राय बीमार, अन्य सदस्य भी अयोध्या से बाहर

जैसे ही एसआईटी की टीम ने अयोध्या पहुंचकर अपनी जांच की प्रक्रिया शुरू की, राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर से एक बड़ी खबर सामने आई। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अचानक बीमार हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनका शुगर लेवल (डायबिटीज) काफी बढ़ गया है और उन्हें सर्दी-जुकाम की भी शिकायत है। वहीं दूसरी ओर, ट्रस्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण सदस्य अनिल मिश्रा अपनी आंखों की जांच कराने के सिलसिले में अचानक केरल के लिए रवाना हो गए हैं। जांच के ठीक वक्त पर ट्रस्ट के दो बड़े चेहरों की अस्वस्थता और अनुपस्थिति को लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में तरह-तरह की चर्चाएं और सस्पेंस गहराने लगा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एसआईटी की यह जांच क्या नया मोड़ लेती है।

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