ऋषिकेश की गलियों में जो बहनें कभी पैदल बांटती थीं टिफिन, आज उनके पास है अफसर की कुर्सी; कहानी भावुक कर देगी!

अगर मन में कुछ बड़ा करने की ठान ली जाए, तो कोई भी मजबूरी आपको रोक नहीं सकती। उत्तराखंड के ऋषिकेश की दो सगी बहनों ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। हाल ही में आए उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा के नतीजों में ऋषिकेश की मीनाक्षी भाटिया ने पहले ही प्रयास में एसडीएम (SDM) का पद हासिल कर लिया है। लेकिन यह कामयाबी इतनी आसान नहीं थी। इसके पीछे सालों का संघर्ष, आंसू और कड़ी मेहनत छिपी है। मीनाक्षी की बड़ी बहन शिल्पा भी पिछले साल इसी परीक्षा को पास करके पौड़ी में सांख्यिकी अधिकारी (Statistical Officer) के पद पर काम कर रही हैं। एक ही साधारण परिवार की दो बेटियों का इतने बड़े सरकारी पदों पर पहुंचना आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

 बचपन में ही उठ गया था पिता का साया, मां ने संभाला घर

इस सफलता के पीछे का दर्द ऐसा है जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। साल 2003 में जब मीनाक्षी सिर्फ डेढ़ साल की थीं, तब उनके पिता का अचानक निधन हो गया। पिता ऋषिकेश बस स्टैंड पर एक छोटी सी दुकान चलाते थे। उनके जाने के बाद परिवार के पास कमाई का कोई जरिया नहीं बचा। ऐसे मुश्किल समय में दोनों बेटियों की मां नीलम भाटिया ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने घर पर ही ‘टिफिन सर्विस’  शुरू की। मां सुबह उठकर खाना बनाती थीं और ये दोनों छोटी बहनें ऋषिकेश की गलियों में पैदल जाकर लोगों के घरों और दफ्तरों तक टिफिन पहुंचाया करती थीं।

 जिस सरकारी दफ्तर में देती थीं टिफिन, अब वहीं बैठेंगी अफसर बनकर

मीनाक्षी ने अपनी पढ़ाई और काम को बहुत अच्छे से संभाला। साल 2020 में उन्होंने ऋषिकेश से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। मीनाक्षी बताती हैं कि टिफिन बांटकर जो थोड़े पैसे जमा हुए, उससे उन्होंने एक स्कूटी खरीदी। स्कूटी आने से उनका पैदल चलने का समय बचने लगा और वह उस समय को पढ़ाई में लगाने लगीं। मीनाक्षी ने एक पुरानी बात याद करते हुए बताया कि वह अपनी स्कूटी से अक्सर तहसील (सरकारी दफ्तर) के कर्मचारियों को भी टिफिन देने जाया करती थीं। आज किस्मत का फैसला देखिए, जिस तहसील में मीनाक्षी कभी हाथों में टिफिन लेकर खड़ी होती थीं, अब उसी दफ्तर को वह एसडीएम बनकर संभालेंगी।

बिना कोचिंग और 4 साल तक सोशल मीडिया से दूरी ने दिलाई सफलता

आज के समय में जहां लोग बिना मोटी फीस वाली कोचिंग के परीक्षा पास नहीं कर पाते, वहीं मीनाक्षी ने बिना किसी कोचिंग के घर पर खुद पढ़ाई (Self Study) करके यह मुकाम पाया है। वह बताती हैं कि वह आईएएस (UPSC) के इंटरव्यू तक भी पहुंच चुकी थीं, लेकिन सिर्फ 5 नंबर से चूक गईं। उस हार से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी बड़ी बहन से प्रेरणा ली और तैयारी में जुटी रहीं। मीनाक्षी ने बताया कि सफलता के लिए वह पिछले चार साल से फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहीं। दोनों बेटियों की इस कामयाबी पर मां का सीना गर्व से चौड़ा है। उनका कहना है कि यह उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो आज भी बेटियों से ज्यादा बेटों को अहमियत देते हैं।

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