कई दिनों से किले में छिपा था चोर, करोड़ों की ऐतिहासिक तोप को टुकड़ों में काटने की साजिश बेनकाब

बुंदेलखंड के ‘कश्मीर’ कहे जाने वाले महोबा जिले के चरखारी कस्बे से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित ऐतिहासिक मंगलगढ़ किले में रखी रियासत कालीन अष्टधातु की बहुमूल्य तोप को चोरी करने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह रही कि आरोपी कई दिनों से किले के भीतर ही छिपकर इस भारी-भरकम तोप को काटने में जुटा था। बताया जा रहा है कि तोप की धातु बेहद कीमती होने के कारण इसकी अंतरराज्यीय तस्करी की तैयारी थी। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

बेहद शातिर तरीके से काट रहा था तोप

जानकारी के मुताबिक आरोपी ने तोप को चुराने के लिए बेहद सुनियोजित तरीका अपनाया था। वह रात के समय किले के सुनसान हिस्से में छिप जाता और दिन में धीरे-धीरे ब्लेड व अन्य औजारों की मदद से तोप को काटता रहता था। आरोपी तोप का एक बड़ा हिस्सा अलग करने में सफल भी हो गया था। इसके बाद वह उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर आसानी से बाहर ले जाने की फिराक में था। माना जा रहा है कि यदि समय रहते इस वारदात का खुलासा नहीं होता तो ऐतिहासिक धरोहर को भारी नुकसान पहुंच सकता था। किले में तैनात कर्मचारियों को जब संदिग्ध गतिविधियों की भनक लगी तो उन्होंने तुरंत नगर पालिका प्रशासन को सूचना दी।

कर्मचारियों की सतर्कता से रंगे हाथ पकड़ा गया आरोपी

सूचना मिलते ही नगर पालिका के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और किले की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। इसी दौरान आरोपी को संदिग्ध हालत में पकड़ लिया गया। तलाशी लेने पर उसके पास से तोप काटने वाले ब्लेड, औजार और पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए। पकड़े गए आरोपी की पहचान रजनीकांत मिश्र के रूप में हुई है, जो गोरखपुर जिले के खैरखुटा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। कर्मचारियों ने बिना देर किए आरोपी को चरखारी कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने नगर पालिका कर्मचारियों की सतर्कता की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि कर्मचारी समय पर कार्रवाई नहीं करते तो किले की अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए गायब हो सकती थी।

पुलिस जांच में जुटी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नगर पालिका की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले इस वारदात को अंजाम दे रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी कई दिनों तक किले के भीतर कैसे छिपा रहा और सुरक्षा कर्मियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। इस घटना के बाद मंगलगढ़ किले की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। इतिहास प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी और आधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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