पूर्व उपराष्ट्रपति का सादगी वाला अंदाज वायरल, VIP इंतजाम छोड़ दरी पर बैठे जगदीप धनखड़

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एक बार फिर अपने सरल स्वभाव को लेकर चर्चा में हैं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नारनोद गांव में आयोजित एक शोक सभा में पहुंचे धनखड़ ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी अब हर तरफ चर्चा हो रही है। दरअसल, उनके बैठने के लिए खास तौर पर सोफे का इंतजाम किया गया था, लेकिन उन्होंने उस पर बैठने से साफ इनकार कर दिया। इसके बजाय वे गांव के अन्य लोगों के साथ जमीन पर बिछी दरी पर बैठ गए। इस दौरान वहां मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए हैरान रह गए। पूर्व उपराष्ट्रपति का यह अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे सादगी तथा जमीन से जुड़े व्यक्तित्व की मिसाल बता रहे हैं। धनखड़ दिल्ली से सड़क मार्ग के जरिए सीधे नारनोद गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने बीजेपी विधायक राजेंद्र भांबू के भाई जगेंद्र सिंह भांबू के निधन पर शोक व्यक्त किया।

‘घमंड नहीं होना चाहिए’ वाले बयान के निकाले जा रहे मायने

शोक सभा के दौरान ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए जगदीप धनखड़ ने जीवन में विनम्रता और सादगी को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में वही व्यक्ति सबसे बेहतर जीवन जीता है, जिसमें घमंड नहीं होता, जिसे गुस्सा कम आता हो और जो हर समय लोगों के लिए उपलब्ध रहता हो। उन्होंने विधायक राजेंद्र भांबू के व्यवहार की तारीफ करते हुए कहा कि उनका स्वभाव बेहद सरल है और यही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए। हालांकि यह बात उन्होंने सामान्य बातचीत में कही, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके बयान के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कई लोग इसे मौजूदा राजनीति में बढ़ते अहंकार और नेताओं के बदलते व्यवहार से जोड़कर देख रहे हैं। यही वजह है कि उनका यह बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक चर्चाओं तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

गांव से जुड़ाव आज भी कायम, पैतृक गांव भी पहुंचे धनखड़

नारनोद गांव में शोक सभा में शामिल होने के बाद जगदीप धनखड़ अपने पैतृक गांव किठाना के लिए रवाना हो गए। झुंझुनूं जिले में स्थित किठाना गांव से उनका पुराना जुड़ाव रहा है और पूर्व उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी वे कई बार यहां आते रहे हैं। ग्रामीणों के बीच उनका अलग ही सम्मान देखने को मिलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े पद पर पहुंचने के बावजूद धनखड़ ने कभी गांव और अपने पुराने रिश्तों को नहीं छोड़ा। यही वजह है कि उनके गांव आने की खबर मिलते ही आसपास के लोग उनसे मिलने पहुंच गए। इस दौरान कई ग्रामीणों ने उनसे मुलाकात की और पुराने दिनों की बातें भी साझा कीं। धनखड़ का यह दौरा पूरी तरह निजी और शोक संवेदना से जुड़ा था, लेकिन उनके व्यवहार और बयानों ने इसे राजनीतिक रूप से भी चर्चा में ला दिया।

इस्तीफे के बाद कम दिखे सार्वजनिक कार्यक्रमों में

गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ ने पिछले वर्ष स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया था। उनके अचानक लिए गए इस फैसले पर उस समय भी काफी चर्चा हुई थी। इस्तीफे के बाद से वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही नजर आए हैं। ऐसे में झुंझुनूं दौरे के दौरान उनकी मौजूदगी और सादगी भरे अंदाज ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खास बात यह रही कि उन्होंने किसी तरह की औपचारिक दूरी बनाए रखने के बजाय आम ग्रामीणों की तरह व्यवहार किया। यही वजह है कि उनका जमीन पर बैठना केवल एक सामान्य घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल उनका यह वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर की जा रही हैं और लोग उनके व्यवहार की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

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