चुनाव की कमान संभालने वाले अधिकारी को मिली बंगाल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी, आखिर क्यों बढ़ा मनोज अग्रवाल पर भरोसा?

पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहे cको अब पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। मनोज अग्रवाल 1990 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव उन्हीं की निगरानी में कराए गए थे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक स्तर पर उनकी कार्यशैली और फैसलों को काफी अहम माना गया। यही वजह है कि नई सरकार बनने के बाद उन्हें राज्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनका कार्यकाल 31 जुलाई तक निर्धारित था, लेकिन उससे पहले ही उन्हें नई भूमिका में नियुक्त कर दिया गया। राज्य सरकार के आदेश में कहा गया है कि वे अगले आदेश तक मुख्य सचिव के पद पर बने रहेंगे। इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसे नई सरकार की बड़ी रणनीतिक नियुक्ति माना जा रहा है।

 राज्यपाल के आदेश के बाद जारी हुआ नियुक्ति पत्र

11 मई 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में साफ कहा गया कि यह नियुक्ति राज्यपाल के आदेश पर की गई है। मनोज अग्रवाल इससे पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ-साथ गृह विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। चुनाव के दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था, मतदान प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे। यही कारण माना जा रहा है कि सरकार ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। बंगाल में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव काफी चर्चा में रहे थे और ऐसे समय में चुनाव आयोग तथा राज्य प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। मनोज अग्रवाल ने इस दौरान प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल करते हुए चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई सरकार ऐसे अधिकारी को आगे लाना चाहती थी जो प्रशासनिक तौर पर मजबूत पकड़ रखता हो और केंद्र तथा राज्य एजेंसियों के बीच संतुलन बना सके।

शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सलाहकार और मंत्रियों को भी दी नई जिम्मेदारी

नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बदलाव कर रहे हैं। इसी कड़ी में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी Subrata Gupta को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है। सुब्रत गुप्ता चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेष रोल ऑब्जर्वर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से लेकर विधानसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं, मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। Dilip Ghosh को ग्रामीण विकास, पंचायत और पशुधन विभाग दिया गया है, जबकि Agnimitra Paul को महिला एवं बाल कल्याण विभाग की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा अशोक कीर्तनिया को खाद्य विभाग और खुदीराम टुडू को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है। वहीं, Nisith Pramanik को उत्तर बंगाल विकास, खेल और युवा कल्याण विभाग दिया गया है। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग अपने पास रखा है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कानून व्यवस्था और प्रशासन सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

पहली कैबिनेट बैठक में सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला

नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक भी काफी अहम रही। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सरकार ने बांग्लादेश सीमा से जुड़े इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। कैबिनेट में तय किया गया कि जिन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अब तक बाड़ नहीं लगी है, वहां सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को 45 दिनों के भीतर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी ताकि कांटेदार बाड़ लगाने का काम तेजी से शुरू हो सके। सरकार का कहना है कि इससे सीमा पार गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार प्रशासनिक फैसलों के जरिए अपनी कार्यशैली का स्पष्ट संदेश देना चाहती है। ऐसे में मनोज अग्रवाल की नियुक्ति को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार और नया प्रशासनिक नेतृत्व मिलकर राज्य में किस तरह के बदलाव लेकर आते हैं।

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