Patna Zoo News: बिहार में सूरज अब आग उगलने लगा है। पारा 40 डिग्री के पार जा चुका है और गर्म हवाओं (लू) ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घने जंगलों की जगह चिड़ियाघर के पिंजरों में रहने वाले इन बेजुबानों का क्या हाल होगा? पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान (Patna Zoo) से जो तस्वीरें और खबरें आ रही हैं, वे वाकई हैरान करने वाली हैं। यहाँ जानवरों को तपिश से बचाने के लिए किसी वीआईपी मेहमान जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। जानवरों को केवल ठंडा वातावरण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि उनके खान-पान को भी पूरी तरह ‘समर फ्रेंडली’ बना दिया गया है।
भालू और शेर खा रहे कूलर की हवा
पटना जू प्रशासन ने इस बार गर्मी को मात देने के लिए तकनीक का पूरा सहारा लिया है। सबसे चौंकाने वाला इंतजाम सांप घर (Reptile House) में है। यहाँ रहने वाले सांपों और मछलियों के लिए 11 नए एयर कंडीशनर (AC) लगाए गए हैं, ताकि बाहर की भीषण गर्मी उनके शरीर के तापमान को प्रभावित न कर सके। वहीं, भालू, शेर, बाघ और तेंदुए जैसे बड़े जानवरों के नाइट शेल्टर में 17 बड़े कूलर और 53 हाई-स्पीड पंखे लगाए गए हैं। जानवरों को दोपहर की तपिश से बचाने के लिए बाड़ों की छतों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है और खस की टट्टियां लगाई गई हैं, जिससे पिंजरों के अंदर का माहौल बिल्कुल ठंडा बना रहता है।
खान-पान में बड़ा बदलाव
इंसानों की तरह ही जानवरों को भी गर्मी में हल्का और रसीला भोजन दिया जा रहा है। चिम्पांजी के लिए तो बाकायदा एक डाइट चार्ट तैयार किया गया है। उन्हें सुबह-सुबह ताज़ा नारियल पानी दिया जा रहा है, ताकि उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो। दोपहर के खाने में उन्हें ‘दही-भात’ परोसा जा रहा है, जो पाचन में आसान और पेट को ठंडा रखता है। इसके अलावा तरबूज, खीरा, ककड़ी, केला और अनार का जूस भी उनके मेन्यू का हिस्सा है। भालू और बंदरों को रसीले अंगूर और संतरे दिए जा रहे हैं। वहीं, मांसाहारी जानवरों के खान-पान की मात्रा थोड़ी कम कर दी गई है ताकि उन्हें भारी भोजन के कारण सुस्ती या बीमारी न हो।
24 घंटे हो रही है मॉनिटरिंग
सिर्फ पिंजरों के अंदर ही नहीं, बल्कि खुले बाड़ों में भी ठंडक का पूरा इंतजाम है। हिरणों और पक्षियों के बाड़ों में ‘मिस्ट फॉगर्स’ और ‘स्प्रिंकलर’ (फुव्वारे) लगाए गए हैं, जो पानी की बारीक बूंदें हवा में छोड़ते हैं। इससे बाड़े का तापमान प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। जू के निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार, सभी जानवरों की सेहत की निगरानी के लिए एक विशेष टीम 24 घंटे काम कर रही है। पानी में ग्लूकोज, इलेक्ट्रॉल पाउडर और जरूरी मल्टीविटामिन मिलाए जा रहे हैं ताकि जानवरों को डिहाइड्रेशन या लू (Heatstroke) का खतरा न रहे। घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे जलीय जीवों के लिए तालाबों के पानी के स्तर को भी मेंटेन किया जा रहा है।
दर्शकों का भी रखा गया ख्याल
चिड़ियाघर प्रबंधन ने न केवल जानवरों, बल्कि यहाँ आने वाले दर्शकों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा है। गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जू पहुँच रहे हैं। दर्शकों के लिए पूरे परिसर में 14 नए वॉटर कूलर चालू किए गए हैं। साथ ही, देसी अंदाज में ठंडक देने के लिए 30 अलग-अलग जगहों पर मिट्टी के घड़ों में ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। जू के कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे जानवरों के व्यवहार में आने वाले किसी भी बदलाव को तुरंत पहचान सकें और मेडिकल इमरजेंसी में डॉक्टरों की टीम को सूचित कर सकें। पटना जू की ये ‘कूल’ तैयारियां इस तपती गर्मी में एक मिसाल पेश कर रही हैं।








