महिला आरक्षक विधेयक पर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, जनगणना को लेकर लगाए गंभीर आरोप

Akhilesh Yadav: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार द्वारा विधेयक पेश किए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर सरकार देश में एकतरफा नीति लागू करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह कश्मीर और असम में कुछ फैसलों के बाद हालात बदले, उसी तरह की रणनीति अब पूरे देश में अपनाई जा रही है। उनका कहना था कि जब तक इस विधेयक में पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया जाता, तब तक इसे स्वीकार करना मुश्किल होगा। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि पुराने प्रस्ताव को लागू किया जाए और नए बिल को वापस लिया जाए।

सपा के आरोपों पर सरकार का पलटवार

सपा के आरोपों पर सरकार की ओर से भी कड़ा जवाब सामने आया। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है और इस तरह की मांग देश की एकता को कमजोर कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश की सभी महिलाओं को समान अवसर देना है, न कि किसी एक वर्ग को अलग से प्राथमिकता देना। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ बयान समाज में भ्रम और चिंता फैलाने वाले हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार जाति आधारित जनगणना कराने के फैसले पर भी आगे बढ़ रही है।

अखिलेश का सरकार पर बड़ा सवाल

बहस के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर सही मायनों में न्याय करना है तो पहले जाति जनगणना के आंकड़े सामने लाए जाएं, ताकि उसी आधार पर आरक्षण तय किया जा सके। अखिलेश ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं ‘आधी आबादी’ का हिस्सा नहीं हैं, और अगर हैं तो उन्हें इस विधेयक में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं जोड़ा गया। इस पर अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है तो अपने टिकट वितरण में मुस्लिम महिलाओं को प्राथमिकता दे सकती है। जवाब में अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि जब वोट की जरूरत थी, तब उन्होंने खुद को पिछड़े वर्ग से जोड़कर पेश किया था।

बहस से बढ़ा सियासी तापमान

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर यह बहस अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर में राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और असंतुलित मान रहा है। खासतौर पर पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को लेकर उठ रहे सवाल इस बहस को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, क्योंकि विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने नजरिए से इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस विधेयक में कोई बदलाव करती है या इसे मौजूदा स्वरूप में ही आगे बढ़ाया जाता है।

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