बेइज्जती के बाद इज्जत बचाने को दौड़ रहा पाकिस्तान? फिर से अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता करवाना चाहते हैं शहबाज-मुनीर!

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया बातचीत का पहला दौर बेनतीजा रहने के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश शुरू कर दी है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद अब दोनों देशों को दोबारा बातचीत की टेबल पर लाने के लिए सक्रिय हो गया है। बताया जा रहा है कि शुरुआती दौर में कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया, लेकिन दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख स्पष्ट कर दिए हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान को उम्मीद है कि बातचीत का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और आगे समाधान निकल सकता है।

सीजफायर डेडलाइन से पहले समझौते की कोशिश

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे मुद्दे को तय समय सीमा से पहले सुलझाना चाहता है। सूत्रों का कहना है कि 22 अप्रैल के आसपास खत्म हो रही संभावित सीजफायर अवधि से पहले किसी नतीजे पर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इसी लक्ष्य के तहत दूसरे दौर की बातचीत कराने की तैयारी भी जारी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ लगातार संपर्क में हैं और दोनों पक्षों को जल्द से जल्द वार्ता फिर से शुरू करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर समय रहते बातचीत नहीं हुई, तो हालात फिर से तनावपूर्ण हो सकते हैं।

शहबाज सरकार की प्राथमिकता बना मुद्दा

सूत्रों के मुताबिक यह पूरी कूटनीतिक पहल सीधे शहबाज शरीफ के निर्देश पर चल रही है। इससे साफ है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को काफी गंभीरता से ले रहा है। इस प्रक्रिया में देश के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह खुद को एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में पेश करे, जो तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान की इस सक्रियता के पीछे उसके अपने रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय हित भी जुड़े हो सकते हैं।

क्या सफल होगी दूसरी कोशिश? नजरें जवाब पर टिकीं

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान पाकिस्तान की इस पहल को सकारात्मक रूप से लेंगे। अभी तक दोनों देशों की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पाकिस्तान को उम्मीद है कि जल्द ही कोई सकारात्मक संकेत मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में संवाद ही एकमात्र रास्ता है, जिससे टकराव को टाला जा सकता है। ऐसे में पाकिस्तान की यह कोशिश कितनी सफल होती है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस संभावित दूसरी बातचीत और उसके नतीजों पर टिकी हुई है।

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