UP News: ताजनगरी आगरा में आज एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ यमुना की गहराई एक युवती को निगलने ही वाली थी कि तभी एक शख्स ‘देवदूत’ बनकर पहुँच गया। मामला वाजिदपुर इलाके के यमुना पुल का है। यहाँ एक 18 साल की दिव्यांग लड़की ने अचानक पुल की रेलिंग के ऊपर से नदी में छलांग लगा दी। उसे पानी में गिरता देख वहां मौजूद लोगों की सांसें अटक गईं। पुल पर खड़े लोग जोर-जोर से शोर मचाने लगे, लेकिन उफनती नदी में उतरने की हिम्मत किसी की नहीं हो रही थी। तभी भीड़ में से एक युवक बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ा और युवती को बचाने के लिए मौत के साये में कूद गया।
मजदूर की जांबाजी ने जीता सबका दिल
जिस युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाई, उसका नाम सुखवीर है। सुखवीर पेशे से एक मजदूर है और पास में ही काम कर रहा था। जैसे ही उसने लोगों की चीख-पुकार सुनी, वह बिना सोचे-समझे नदी की तरफ दौड़ा। पानी गहरा था और बहाव भी तेज था, लेकिन सुखवीर के इरादे उससे भी ज्यादा मजबूत थे। उसने कड़े संघर्ष के बाद डूब रही युवती को ढूंढ निकाला और उसे सुरक्षित किनारे पर ले आया। मौके पर मौजूद लोग सुखवीर के इस साहस को देखकर दंग रह गए। अब इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और हर कोई सुखवीर की बहादुरी को सलाम कर रहा है।
आखिर क्यों उठाया युवती ने यह खौफनाक कदम?
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँच गई। जब पुलिस ने मामले की छानबीन की और युवती के बारे में पता लगाया, तो जानकारी मिली कि वह दिव्यांग है। परिजनों के मुताबिक, युवती की मानसिक स्थिति पिछले कुछ समय से ठीक नहीं है, जिसका इलाज चल रहा है। हालांकि, वह घर से निकलकर अकेले पुल तक कैसे पहुँची और उसके मन में ऐसा विचार क्यों आया, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। पुलिस ने युवती को काफी देर तक समझाया और उसकी काउंसलिंग की, ताकि वह दोबारा ऐसा कदम न उठाए। इस घटना ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
परिजनों की आँखों में आंसू
पुलिस ने कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद युवती को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया है। अपनी बेटी को सही-सलामत वापस पाकर परिजनों की आँखों में आंसू आ गए। उन्होंने सुखवीर का बार-बार धन्यवाद किया और कहा कि आज उसकी वजह से ही उनके घर का चिराग बुझने से बच गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या युवती के साथ कोई अनहोनी हुई थी या यह सिर्फ मानसिक परेशानी का नतीजा था। फिलहाल, पूरे इलाके में सुखवीर के साहस की चर्चा है और उसे सम्मानित करने की मांग भी उठ रही है।








