ओडिशा में राकेश टिकैत को पुलिस ने रोका? किसान नेता ने लगाए गंभीर आरोप, सरकार पर उठे सवाल

ओडिशा के भुवनेश्वर में किसान नेता राकेश टिकैत और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद सुधाकर सिंह के साथ पुलिस प्रशासन की कथित दुर्व्यवस्था को लेकर विवाद गरमाया है। टिकैत ने आरोप लगाया कि गेस्ट हाउस में उन्हें ठीक से नहीं रखा गया और किसानों से मिलने से भी रोका गया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया, जिससे उन्हें आंदोलन का समर्थन करने में बाधा आई।

टिकैत के अनुसार, गेस्ट हाउस के पास भारी पुलिस तैनाती ने उनके आस-पास के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। कई लोग उनके पास आने से डर रहे थे। टिकैत ने आरोप लगाया कि गेस्ट हाउस में उनके लिए भोजन और पानी की उचित व्यवस्था भी नहीं की गई। उनका कहना था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर किसानों और आंदोलन समर्थकों के साथ ऐसा किया।

पुलिस का जवाब: आरोपों से इनकार

भुवनेश्वर पुलिस आयुक्त एस देव दत्ता ने टिकैत और सांसद सुधाकर सिंह के आरोपों का खंडन किया। आयुक्त ने कहा कि गेस्ट हाउस में कुछ पुलिसकर्मियों को सांसद की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया और टिकैत या सांसद को रुकने से रोका नहीं गया।

पुलिस के अनुसार, किसान सभा की तिथि बदलने और सभा के दौरान हंगामा होने के कारण कुछ किसानों को हिरासत में लिया गया था। गेस्ट हाउस में सुरक्षा तैनात करना केवल प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि सांसद सुधाकर सिंह को किसानों से मिलने में असुविधा नहीं हुई थी, बल्कि सुरक्षा कारणों से कुछ व्यवस्थाएं की गई थीं।

टिकैत के आरोप: सरकार किसानों के पक्ष में नहीं

राकेश टिकैत ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरन मांझी पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों और आम जनता के बजाय कॉर्पोरेट घरानों के लिए काम कर रही है। टिकैत ने कहा कि वह जल्द ही ओडिशा का एक और दौरा करेंगे और किसानों की समस्याओं को सामने लाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के हितों के लिए आंदोलन को समर्थन देने के बावजूद उन्हें रोकना और गेस्ट हाउस में उचित सुविधा न देना निंदनीय है। टिकैत ने इस घटना को बीजेपी और राज्य सरकार के खिलाफ एक रणनीतिक कदम बताया, जो किसानों के अधिकारों और आवाज़ को दबाने का प्रयास है।

राजद सांसद सुधाकर सिंह का बयान और आगे की कार्रवाई

सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि उन्हें भी किसानों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने की बात कही है और कहा कि पुलिस प्रशासन ने एक निर्वाचित सांसद के लिए कई समस्याएं पैदा की हैं। सुधाकर सिंह का कहना है कि लोकतंत्र में ऐसा व्यवहार अनुचित है और सरकार को किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।

इस पूरे मामले ने ओडिशा में किसान आंदोलनों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गेस्ट हाउस विवाद से साफ दिखता है कि सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। किसानों और नेताओं की आवाज़ को दबाना राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से सही नहीं माना जाएगा।

Read More-Oracle में महाभूकंप! 30 हजार नौकरियां खत्म, भारत पर सबसे बड़ा वार

Hot this week

‘वो कपड़े उतार देता…’ Vaibhav Suryavanshi को लेकर ये कैसा बयान दे गए रवि शास्त्री?

भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav...

समंदर में भारतीय क्रू का शिकार करने आए थे खूंखार लुटेरे, अचानक आसमान से टपके MARCOS कमांडो और फिर…

अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त और संवेदनशील रूट...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img