लखनऊ से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी राजनीतिक हलचल क्यों न हो, बंगाल की जनता एक बार फिर ममता बनर्जी को सत्ता में वापस लाने का मन बना चुकी है। ओवैसी की एंट्री पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश ने साफ संकेत दिया कि इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और जनता अपने पुराने भरोसे पर कायम रहेगी। उनका कहना था कि लोकतंत्र और सेक्युलर सोच को बचाने के लिए जनता एकजुट होकर फैसला लेगी।
पीडीए और समाजवादी विचारधारा पर जोर
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यही ताकत देश को सही दिशा में आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि समाजवादी आंदोलन की जड़ें मजबूत हैं और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। लोहिया पार्क में आयोजित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी सोच ही समाज को खुशहाली की ओर ले जा सकती है।
जातीय जनगणना और सरकार पर सवाल
सपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जातीय जनगणना को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं दिख रही। उनका आरोप था कि पिछड़े और दलित वर्गों की सही गिनती से सरकार बच रही है। उन्होंने कहा कि अगर सामाजिक न्याय की बात करनी है तो हर वर्ग को उसकी आबादी के हिसाब से अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए जरूरी कदम बताया।
महंगाई, निवेश और किसानों के मुद्दे उठाए
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि जिन निवेश समझौतों (एमओयू) की बात की जाती है, उनमें से कितना निवेश जमीन पर उतरा है। साथ ही उन्होंने महंगाई को लेकर कहा कि ज्यादा मुनाफाखोरी भी भ्रष्टाचार का एक रूप है। किसानों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि आलू उत्पादकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिल रही। उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर किसानों के लिए किए गए वादों का क्या हुआ।








