रिश्तों का कत्ल: जिसे कहती थी ‘मामा’, उसी ने उजाड़ी दुनिया; 3 साल बाद कोर्ट ने क्या किया फैसला? 

UP News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने समाज की सोच पर गहरा प्रहार किया है। यहाँ एक मासूम भांजी ने जिसे अपनी सुरक्षा का रक्षक समझा, वही उसकी अस्मत का भक्षक बन बैठा। चंदौसी इलाके में हुए इस जघन्य अपराध ने न केवल एक परिवार को तोड़ कर रख दिया, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर दिया। तीन साल तक चले लंबे कानूनी संघर्ष और पीड़ा के बाद, आखिरकार न्याय की जीत हुई है। विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

भरोसे की आड़ में दरिंदगी का खेल

यह पूरी घटना अक्टूबर 2023 की है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। पीड़िता की माँ ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया था कि रामपुर का रहने वाला जगत सिंह उनके घर ‘मुंहबोला भाई’ बनकर आता-जाता था। घर का सदस्य होने के नाते उस पर कोई शक नहीं करता था और पीड़िता उसे ‘मामा’ कहकर संबोधित करती थी। लेकिन इस पवित्र रिश्ते की आड़ में जगत सिंह के इरादे बेहद खौफनाक थे। एक दिन जब घर पर कोई नहीं था, उसने नाबालिग किशोरी के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। इतना ही नहीं, उसने मासूम को डराया-धमकाया कि अगर उसने इस बारे में किसी को भी बताया तो वह उसे जान से मार देगा। डरी-सहमी किशोरी ने काफी समय तक इस दर्द को अपने सीने में दबाए रखा, लेकिन अंततः हिम्मत जुटाकर अपनी माँ को आपबीती सुनाई, जिसके बाद 3 अक्टूबर 2023 को मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

न्यायालय का कड़ा रुख और 20 साल का कठोर कारावास

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तेजी से आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल की। केस की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आदित्य सिंह ने मजबूती से दलीलें पेश कीं। अदालत में पीड़िता सहित कुल सात गवाहों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पाया कि जगत सिंह ने न केवल कानून तोड़ा बल्कि एक पवित्र सामाजिक रिश्ते का भी अपमान किया है। अदालत ने जगत सिंह को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि समाज में ऐसे अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है, जहाँ रक्षक ही भक्षक बन जाए।

भारी जुर्माना और न्याय की जीत का संदेश

जेल की सजा के साथ-साथ कोर्ट ने दोषी पर 30 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी जोड़ा कि यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को जमा करने में विफल रहता है, तो उसे चार महीने का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने राहत की सांस ली है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के त्वरित और कड़े फैसलों से अपराधियों में डर पैदा होगा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी आएगी। ‘देर आए दुरुस्त आए’ की तर्ज पर संभल की इस बेटी को मिला न्याय आज उन सभी के लिए एक मिसाल है जो जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं।

Read More-वीडियो कॉल पर कैद, खाते से गायब करोड़ों!’ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.07 करोड़ की ठगी, हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img