PM Modi Israel Visit 2026: मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi बुधवार, 25 फरवरी 2026 को दो दिवसीय दौरे पर Israel पहुंचे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है और वैश्विक ताकतों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती दिख रही है। इजरायल पहुंचने पर पीएम मोदी ने कहा कि वे द्विपक्षीय वार्ताओं और भारत-इजरायल मित्रता को नई ऊंचाई देने वाले ठोस परिणामों की उम्मीद करते हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे में रक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृषि नवाचार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। प्रधानमंत्री का यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन साधते हुए नए अवसरों की तलाश कर रहा है।
पाकिस्तान में क्यों बढ़ी बेचैनी
पीएम मोदी की इस यात्रा को लेकर पाकिस्तान में खासा राजनीतिक और मीडिया हलचल देखने को मिल रही है। पाकिस्तानी संसद में हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के एक बयान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारत और इजरायल के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियां क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा तकनीक और ड्रोन सिस्टम में सहयोग पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन रहा है। इसी संदर्भ में इजरायली नेतृत्व द्वारा कथित “हेक्सागन एलायंस” जैसे विचारों का जिक्र पाकिस्तान में आशंकाएं बढ़ा रहा है। हालांकि भारत की आधिकारिक नीति हमेशा यह रही है कि उसके संबंध किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होते, बल्कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान के भीतर इस यात्रा को सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टि से गंभीरता से देखा जा रहा है।
इस्लामी देशों की नजर और संभावित समीकरण
इजरायल की गाजा में कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव के बीच कई इस्लामी देशों की नजर भी इस यात्रा पर टिकी हुई है। हाल के महीनों में Donald Trump द्वारा ईरान को लेकर दिए गए कड़े बयानों ने भी मिडिल ईस्ट की स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे माहौल में भारत की सक्रिय कूटनीति पर अरब देशों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत ने एक ओर फिलिस्तीन के लिए मानवीय सहायता और शांति की अपील की है, वहीं दूसरी ओर इजरायल के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी आगे बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की विदेश नीति अब बहु-आयामी हो चुकी है, जहां वह अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध मजबूत कर रहा है। इस संतुलन की नीति के कारण भारत की भूमिका क्षेत्रीय राजनीति में और भी अहम हो सकती है।
रणनीतिक साझेदारी का भविष्य और कूटनीतिक संदेश
भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे, लेकिन पिछले एक दशक में इन रिश्तों में उल्लेखनीय तेजी आई है। 2017 में पीएम मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस प्रगति हुई। इस बार भी प्रधानमंत्री का कार्यक्रम इजरायली संसद को संबोधित करने, भारतीय समुदाय से मुलाकात और तकनीकी प्रदर्शनी में भाग लेने का है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देश केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि नवाचार और आर्थिक साझेदारी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह यात्रा भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का संदेश देती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह दौरा क्षेत्रीय राजनीति में किसी नए रणनीतिक समीकरण की नींव रखता है या केवल द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करता है।








