बारामती का रण: क्या अजित दादा की ‘विरासत’ को मिलेगा ‘सहानुभूति’ का साथ? मतदान के बीच पार्थ पवार ने कही बड़ी बात

बारामती उपचुनाव 2026: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित विधानसभा सीट ‘बारामती’ में आज भविष्य और विरासत की जंग लड़ी जा रही है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह चुनाव क्षेत्र के लिए कितना संवेदनशील है। इस साल की शुरुआत में एक दुखद विमान दुर्घटना में दिग्गज नेता अजित पवार के असामयिक निधन के कारण यह उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बारामती की जनता अपने ‘दादा’ की कमी को वोट की ताकत से भरेगी? मतदान के शुरुआती घंटों के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के युवा नेता पार्थ पवार ने केंद्र पर पहुंचकर अपना वोट डाला और जनता से लोकतंत्र को मजबूत करने की अपील की।

पार्थ पवार का आह्वान: ‘घरों से निकलें और इतिहास लिखें’

वोट डालने के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए पार्थ पवार ने काफी संतुलित लेकिन गहरा बयान दिया। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि लोग घरों से निकलकर अधिक से अधिक मतदान करेंगे। यह समय बारामती के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का है।” पार्थ पवार का यह बयान न केवल मतदाताओं को जागरूक करने वाला है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में इसे अपनी ताकत दिखाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। मतदान के बाद अपनी उंगली पर लगी स्याही दिखाते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे उनके समर्थक ‘युवा नेतृत्व’ के उभार के तौर पर देख रहे हैं।

सुनेत्रा पवार की भावुक अपील

इस उपचुनाव में अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार खुद चुनावी मैदान में हैं। उन्होंने मतदान शुरू होने से पहले बारामती की जनता के नाम एक बेहद भावुक संदेश जारी किया। सुनेत्रा पवार ने कहा, “बारामती के लोग पिछले 60 वर्षों से पवार परिवार के साथ एक परिवार की तरह खड़े रहे हैं। आज दादा हमारे बीच नहीं हैं, और यह पहला चुनाव है जो उनके बिना लड़ा जा रहा है। मुझे विश्वास है कि यहाँ की जनता अपना हर वोट अजित दादा को एक सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में देगी।” उनके इस बयान ने चुनाव को ‘विकास बनाम भावना’ की दिशा में मोड़ दिया है, जिससे सहानुभूति की एक लहर स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है।

 23 उम्मीदवार और 3.84 लाख मतदाताओं का फैसला

तकनीकी पक्ष की बात करें तो बारामती उपचुनाव में इस बार कुल 23 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। निर्वाचन क्षेत्र में 3.84 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं, जिनके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राहुरी सीट पर भी उपचुनाव जारी है, लेकिन बारामती की राजनीतिक अहमियत ने इसे केंद्र बिंदु बना दिया है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अजित पवार के निधन के बाद पैदा हुई सहानुभूति और सुनेत्रा पवार का प्रशासनिक अनुभव उन्हें अन्य उम्मीदवारों की तुलना में मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। शाम 6 बजे तक चलने वाली यह वोटिंग प्रक्रिया तय करेगी कि बारामती की कमान किसके हाथों में सुरक्षित रहेगी।

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