सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने देश में बनाई ‘इश्क करो पार्टी’, महुआ मोइत्रा को भेजा न्योता, जानें कॉकरोच जनता पार्टी पर क्या कहा?

भारत की राजनीति में आए दिन नए-नए मोड़ देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार जो खबर आई है, उसने सबको हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर हाल ही में चर्चा बटोरने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद, अब देश के सामने एक और अनोखी पार्टी आ गई है। इस पार्टी का नाम है ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP)। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अजीबोगरीब नाम वाली पार्टी को किसी आम इंसान ने नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने बनाया है। जस्टिस काटजू ने न सिर्फ इस पार्टी की घोषणा की, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा को भी अपनी इस नई पार्टी में शामिल होने का खुला न्योता दे दिया है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

 देश की भलाई के लिए है ‘इश्क’ का संदेश

अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले जस्टिस काटजू ने खुद साफ किया है कि लोग इस नाम को सुनकर कोई गलतफहमी न पालें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर लिखा कि लोग शायद इसे कोई मजाक समझ रहे होंगे। उन्हें लग रहा होगा कि यह लड़के-लड़कियों के बीच रोमांस या वैलेंटाइन डे को बढ़ावा देने वाली कोई संस्था है, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। काटजू के मुताबिक, देश में फैली गरीबी, बेरोजगारी और बच्चों में कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं को सिर्फ और सिर्फ जनता की ‘एकता’ से ही खत्म किया जा सकता है। इस पार्टी का मकसद देश के हर नागरिक के दिल में एक-दूसरे के लिए बिना किसी जाति, धर्म या नस्ल के भेदभाव के ‘इश्क’ यानी सच्चा प्रेम पैदा करना है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर बरसे काटजू

जस्टिस काटजू ने अपनी इस नई मुहिम के साथ ही देश में चल रहे अन्य प्रदर्शनों पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की जमकर आलोचना की। दरअसल, अभिजीत दीपके नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस पर काटजू ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना सरासर मूर्खता है। अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे भी देते हैं, तो उनकी जगह कोई दूसरा मंत्री आकर बैठ जाएगा, इससे देश की व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है।

नेताओं के सत्ता लालच के खिलाफ एक नया जनसंघर्ष

अपने इस नए राजनीतिक प्रयोग को लेकर जस्टिस काटजू बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। उनका आरोप है कि आज के दौर के नेताओं को सिर्फ सत्ता का लालच है और उन्हें जनता की असली तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है। ‘इश्क करो पार्टी’ का असली मकसद इसी राजनीतिक बुराई को खत्म करना है। काटजू का मानना है कि जब तक देश के लोग आपस में नफरत छोड़कर प्रेम से नहीं रहेंगे, तब तक एक मजबूत और आधुनिक सोच वाला नेतृत्व तैयार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि जस्टिस काटजू के इस ‘इश्क’ वाले फॉर्मूले पर देश की जनता और खासकर महुआ मोइत्रा की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।

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