किसानों को सरकार दे रही है लाखों की मदद! खेती से जुड़े इन 5 कामों के लिए मिल सकता है पैसा

Farmer Scheme: खेती में हर सीजन किसान के सामने पैसों की जरूरत खड़ी हो जाती है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मशीनों पर काफी खर्च होता है। ऐसे में केंद्र सरकार की कुछ योजनाएं किसानों को सीधे आर्थिक सहायता के साथ कम ब्याज पर कर्ज और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी देती हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते हैं। यह रकम तीन किस्तों में 2,000-2,000 रुपये करके सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए खेती से जुड़े जरूरी खर्चों के लिए 3 लाख रुपये तक का कर्ज लेने की सुविधा मिल सकती है। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को ब्याज में अतिरिक्त राहत भी मिलती है।

सिंचाई से लेकर कृषि मशीनों तक पर मिल सकती है सब्सिडी

अगर किसान सिंचाई का खर्च कम करना चाहते हैं तो पीएम कुसुम योजना उनके लिए उपयोगी हो सकती है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलाकर 60 फीसदी तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। इससे डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा कृषि मशीनीकरण योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी दी जाती है। योजना के तहत पात्रता और मशीन के हिसाब से सहायता अलग-अलग हो सकती है। कुछ मामलों में यह सब्सिडी 40 से 80 फीसदी तक बताई जाती है। इससे ट्रैक्टर, रोटावेटर और दूसरे कृषि यंत्र खरीदना किसानों के लिए आसान हो सकता है।

फसल रखने के लिए भी मिल सकता है 2 करोड़ तक का कर्ज

फसल तैयार होने के बाद उसे सुरक्षित रखना भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती होती है। अगर भंडारण की सुविधा न हो तो किसान को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ सकती है। ऐसे में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए पात्र किसान, किसान समूह और संबंधित संस्थाएं गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और अन्य कृषि ढांचा तैयार करने के लिए वित्तीय सहायता ले सकते हैं। इस योजना के तहत 2 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट के लिए कर्ज की सुविधा उपलब्ध है। इन पांचों योजनाओं का मकसद खेती की लागत और किसानों की वित्तीय परेशानी को कम करना है। हालांकि, हर योजना में पात्रता, दस्तावेज और मिलने वाली सहायता अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित सरकारी पोर्टल या कृषि विभाग से ताजा नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

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