क्या राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल होना पड़ेगा महंगा? AAP करेगी कार्रवाई की मांग, जाने नियम

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी (AAP), जो करीब 14 साल पहले राजनीति में एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में उभरी थी, आज सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। शुक्रवार  को पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम ने पार्टी की आंतरिक एकता और नेतृत्व क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे अब तक की सबसे बड़ी दल-बदल घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

राघव चड्ढा समेत कई सांसद BJP में शामिल

राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने बताया कि उन्होंने और अन्य सांसदों ने संविधान के नियमों के अनुसार पार्टी बदलने का निर्णय लिया है। उनके साथ Sanjay Singh और अन्य नेताओं के नाम भी इस घटनाक्रम में चर्चा में हैं। दावा किया गया कि राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक जैसे नेताओं ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है। साथ ही यह भी कहा गया कि सभी सांसदों ने राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक पत्र सौंपा है, जिसमें इस बदलाव की जानकारी दी गई है। इस पत्र पर सांसदों के हस्ताक्षर भी होने का दावा सामने आया है।

AAP ने BJP पर लगाया का आरोप

आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को सीधे तौर पर बीजेपी का “ऑपरेशन लोटस” बताया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव और राजनीतिक रणनीति के तहत उसके नेताओं को तोड़ा जा रहा है। AAP नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ पार्टी का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी संकट है। पार्टी का दावा है कि इसका उद्देश्य पंजाब में Bhagwant Mann की सरकार को कमजोर करना है। वहीं, AAP सांसद संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को जनता के साथ विश्वासघात बताया है और कड़ी राजनीतिक लड़ाई की चेतावनी दी है।

 AAP की कानूनी लड़ाई की तैयारी

भारतीय जनता पार्टी ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए सभी नए सदस्यों का पार्टी मुख्यालय में अभिनंदन किया। पार्टी नेतृत्व ने कहा कि ये सभी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे से प्रभावित होकर शामिल हुए हैं। वहीं, AAP ने साफ किया है कि वह इस मामले को दल-बदल विरोधी कानून के तहत चुनौती देगी। संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत AAP का कहना है कि यह कदम पार्टी व्हिप का उल्लंघन है और संबंधित सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। दूसरी ओर, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में संसद से लेकर न्यायालय तक चर्चा में रह सकता है।

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