मोदी-बादल की मुलाकात के बाद पंजाब में क्यों मची हलचल? गठबंधन पर फिर शुरू हुई चर्चा

पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक के बाद पंजाब की सियासत में एक बार फिर बीजेपी और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मुलाकात के बाद सुखबीर बादल ने गठबंधन को लेकर कोई सीधा ऐलान नहीं किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ पंजाब की कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।

पीएम मोदी से मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

सुखबीर सिंह बादल ने मुलाकात के बाद कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दे रखे। इनमें राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुख रहा। पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी की सरकार है और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को बीजेपी, अकाली दल और कांग्रेस अलग-अलग मुद्दों पर घेरते रहे हैं। ऐसे में सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों दल भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं या यह मुलाकात सिर्फ पंजाब के मुद्दों तक सीमित थी।

केजरीवाल के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए बीजेपी और अकाली दल के बीच संभावित नजदीकी पर सवाल उठाया। केजरीवाल ने कहा कि क्या दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन होने जा रहा है। उनका यह बयान सामने आने के बाद पंजाब की राजनीति में गठबंधन की चर्चाओं को और हवा मिल गई। दरअसल, पिछले कुछ समय से बीजेपी पंजाब में अपने संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी के कुछ सांसदों के बीजेपी में जाने के बाद राज्य की राजनीति में पहले से ही कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे माहौल में बादल और पीएम मोदी की बैठक को लेकर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

कभी साथ थे बीजेपी और अकाली दल, फिर क्यों टूटा था रिश्ता?

बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक अहम रहा है। दोनों पार्टियों ने कई चुनाव साथ मिलकर लड़े और केंद्र तथा राज्य की राजनीति में एक-दूसरे का साथ दिया। हालांकि, सितंबर 2020 में कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया और अकाली दल ने बीजेपी से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग मैदान में उतरीं। 117 सीटों वाली विधानसभा में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ बड़ी जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 18, अकाली दल को 3 और बीजेपी को एक सीट मिली थी। इससे पहले 2017 में कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थीं, जबकि आप को 20, अकाली दल को 15 और बीजेपी को 3 सीटें मिली थीं।

Read More-Gen Z को लेकर मोहन भागवत के बयान पर भड़की कांग्रेस, प्रियंका गांधी ने क्यों साधा निशाना?

 

Hot this week

RSS प्रमुख की बात से गदगद अभिजीत दीपके, BJP नेताओं को दे डाली बड़ी नसीहत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के Gen...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img