Abhishek Banerjee News: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें सेवाश्रय विवाद को लेकर बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले डायमंड हार्बर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद अब बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन में भी उनके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी की ओर से दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस नए घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सेवाश्रय कार्यक्रम के संचालन के दौरान कई नियमों का पालन नहीं किया गया और वित्तीय लेनदेन में भी गंभीर अनियमितताएं हुईं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
वित्तीय गड़बड़ी और बिना अनुमति संचालन के आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि सेवाश्रय परियोजना करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय फ्रॉड से जुड़ी हुई है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि संबंधित केंद्र बिना आवश्यक सरकारी अनुमति और लाइसेंस के संचालित किए जा रहे थे। प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि यदि किसी प्रकार की सरकारी मंजूरी नहीं थी, तो सेवाश्रय कार्यक्रम इतने लंबे समय तक किस आधार पर चलता रहा। राज्य सचिवालय से भी इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि संचालन के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
कई अन्य लोगों के खिलाफ भी दर्ज हुआ मामला
एफआईआर में केवल अभिषेक बनर्जी का ही नाम नहीं है, बल्कि उनके निजी सहयोगियों और कार्यक्रम से जुड़े कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत में अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय, अयान घोष दस्तीदार, जहांगीर खान समेत कई अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा सेवाश्रय कैंप में काम करने वाले कुछ डॉक्टरों, लैब टेक्नीशियन, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, एटॉमिक एनर्जी एक्ट और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है और संबंधित दस्तावेजों व रिकॉर्ड को खंगाल रही है।
चुनाव से पहले शुरू हुआ कार्यक्रम अब बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
सेवाश्रय कार्यक्रम की शुरुआत जनवरी 2025 में अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर से हुई थी। बाद में इसे दिसंबर 2025 में दोबारा शुरू किया गया और इसका विस्तार नंदीग्राम सहित अन्य इलाकों तक किया गया। विधानसभा चुनाव से पहले इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था, जो अब और गहरा गया है। सत्ता परिवर्तन के बाद कार्यक्रम के संचालन और फंडिंग को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अपनी-अपनी जांच कर रहे हैं। वहीं, इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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