TMC में टूट पर हुमायूं कबीर की खुली चुनौती: “पिक्चर अभी बाकी है, असली…”

पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हुई अब तक की सबसे बड़ी बगावत ने राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। टीएमसी में मची इस अंदरूनी कलह और टूट पर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने तीखा तंज कसा है। कबीर ने सीधे तौर पर टीएमसी के नंबर दो नेता अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में लोकतंत्र खत्म हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि कुछ खास विधायकों को दरकिनार करके शोभनदेव चट्टोपाध्याय को गलत तरीके से विपक्ष का नेता चुनना इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ है। हुमायूं कबीर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, असली ‘खेला’ तो अब शुरू होने जा रहा है।

ममता बनर्जी के सीएम बनने पर उठाए सवाल, शुभेंदु अधिकारी को बताया असली बॉस

हुमायूं कबीर ने केवल अभिषेक बनर्जी पर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने साल 2021 के विधानसभा चुनावों की याद दिलाते हुए कहा कि ममता बनर्जी खुद का चुनाव हार गई थीं। यह पार्टी के 213 विधायक थे जिन्होंने अपनी मेहनत से सीटें जीतीं ताकि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ सकें। चुनाव हारने के बावजूद उन्हें नेता चुन लिया गया। कबीर ने दावा किया कि अब राज्य की कमान शुभेंदु अधिकारी के हाथों में है, जो पिछले चार सालों में अपने साथ हुए हर अन्याय का हिसाब ले रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी को पूरी तरह बिखेर कर रख दिया है और अब बागी गुट ममता की सत्ता को सीधी चुनौती दे रहा है।

लोकसभा में भी लगेगा झटका, 20 सांसदों के पाला बदलने का बड़ा दावा

हुमायूं कबीर की मानें तो टीएमसी के लिए मुश्किलें सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं रहने वाली हैं। उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि मैंने छह महीने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि टीएमसी बंगाल में चुनाव हारेगी और पार्टी में बड़ी टूट होगी, जो आज सच साबित हो रही है। विधानसभा में 60 से अधिक विधायक बगावत का झंडा बुलंद कर चुके हैं और एक ‘नई टीएमसी’ बनाने की राह पर हैं। इसके साथ ही कबीर ने सीक्रेट इनपुट का हवाला देते हुए कहा कि टीएमसी के कुल 41 लोकसभा सांसदों में से लगभग 20 सांसद भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने के मूड में हैं। ये सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देते हुए लोकसभा अध्यक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर चुके हैं।

कुणाल घोष का पलटवार, बागी ऋतब्रत बनर्जी के गुट को मिली विधानसभा में मान्यता

इस बड़ी राजनीतिक उठापटक के बीच टीएमसी के संकटमोचक कुणाल घोष ने पार्टी का बचाव किया है। उन्होंने विरोधियों को दो टूक शब्दों में कहा कि टीएमसी का मतलब सिर्फ ममता बनर्जी है और सभी वफादार कार्यकर्ता ‘दीदी’ के साथ मुस्तैदी से खड़े हैं। उन्होंने बागियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग दीदी की तस्वीर और टीएमसी के सिंबल पर जीतकर आए, वे आज विपक्ष के जाल में फंस रहे हैं। हालांकि, ज़मीनी हकीकत टीएमसी के लिए चिंताजनक होती जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष रतींद्र बोस ने टीएमसी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को विधानसभा में अलग ‘विधायक दल’ के रूप में मान्यता दे दी है। इस गुट को 58 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने ऋतब्रत को अपना नेता चुना है। दिलचस्प बात यह है कि इस बागी गुट ने अभी भी ममता बनर्जी से अपनी नई व्यवस्था में मुख्य सलाहकार बनने का अनुरोध किया है, जिसने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह सस्पेंस में डाल दिया है।

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