दिल्ली की राजनीति में मंगलवार का दिन भारी गहमागहमी भरा रहा। राजधानी की सड़कों पर अचानक उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब विपक्ष के कई दिग्गज नेता एक साथ सड़क पर उतर आए। हाल ही में छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के विरोध में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की। प्रदर्शन कर रहे नेताओं को जब पुलिस ने चारों तरफ से घेरना शुरू किया, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक वीडियो और उनका बयान तेजी से चर्चा में आ गया। जैसे ही पुलिसकर्मी अखिलेश यादव को हिरासत में लेकर बस की तरफ ले जाने लगे, उन्होंने बहुत ही सहज और मजाकिया अंदाज में पुलिस वालों से पूछा— “कहां ले जा रहे हो पुलिस भाई?” उनका यह सवाल देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और सियासी गलियारों में बहस का नया मुद्दा बन गया।
छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद भड़का विपक्षी नेताओं का गुस्सा
इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत असल में एक दिन पहले यानी 20 जुलाई से हुई थी। दिल्ली में सीजेपी (CJP) के संसद मार्च के दौरान देश भर से आए हजारों छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर एकत्र हुए थे। उस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने उग्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद छात्रों और युवाओं में भारी रोष फैल गया। छात्रों के साथ हुई इस बदसलूकी और पुलिसिया बल प्रयोग के खिलाफ अगले ही दिन यानी मंगलवार (21 जुलाई) को विपक्ष के तमाम बड़े चेहरे एकजुट हो गए। छात्रों की आवाज को बुलंद करने और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सभी नेताओं ने पीएम आवास की ओर रुख किया, जिससे पूरी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करनी पड़ी।
राहुल, प्रियंका और अखिलेश समेत कई बड़े नेता हुए डिटेन
पीएम आवास के बाहर हो रहे इस विशाल धरने में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई अन्य विपक्षी दलों के शीर्ष नेता कंधे से कंधा मिलाकर बैठे थे। नेताओं के इस जमावड़े और नारेबाजी को देखते हुए पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति को हाथ से निकलता देख पुलिस ने मौके पर मौजूद सभी प्रमुख नेताओं को जबरन उठाना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और नेताओं के बीच काफी कहासुनी और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। अंततः सुरक्षाकर्मियों ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत कई सांसदों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। नेताओं को पुलिस गाड़ियों में भरकर अलग-अलग थानों में ले जाया गया ताकि इलाके में शांति व्यवस्था कायम रखी जा सके।
लोकतंत्र और युवाओं के हक के लिए जारी रहेगा संघर्ष
नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद भी विपक्ष के सुर धीमे नहीं पड़े हैं। हिरासत में लिए जाने के दौरान अखिलेश यादव ने मीडिया और पुलिस से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों की जायज मांगों को दबाने के लिए पुलिस बल का सहारा ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर विपक्ष और जनता की आवाज को खामोश करना चाहती है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए कहा कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक सड़क से लेकर संसद तक यह लड़ाई इसी तरह जारी रहेगी।
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