ईरान ने कहा रास्ता खुला… फिर क्यों लौटे भारतीय टैंकर? सामने आई चौंकाने वाली वजह!

मध्य-पूर्व के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता गहराती दिख रही है। ईरान की ओर से यह दावा किया गया था कि संघर्ष विराम के दौरान यह जलमार्ग पूरी तरह खुला है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। ताजा घटनाक्रम में कई भारतीय तेल टैंकर, जो दुबई से होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे, अचानक बीच रास्ते से वापस लौट गए। इससे यह संकेत मिलता है कि भले ही आधिकारिक तौर पर रास्ता खुला बताया जा रहा हो, लेकिन सुरक्षा और संचालन को लेकर जहाज मालिकों में भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की सप्लाई होती है।

भारतीय और विदेशी टैंकरों ने क्यों बदला रास्ता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार भारतीय टैंकर—सनमार हेराल्ड, देश गरिमा, देश वैभव और देश विभोर—होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन अचानक उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया। इसी तरह दो ग्रीक टैंकर भी इस मार्ग को पार नहीं कर सके। बताया जा रहा है कि इन जहाजों में लाखों बैरल गैर-ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ था, जो अगर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ता तो यह हाल के संघर्ष के बाद एक बड़ा तेल प्रवाह साबित होता। फिलहाल ये जहाज ईरान के क़ेश्म द्वीप के आसपास देखे गए हैं। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने अहम जहाजों ने अचानक यू-टर्न ले लिया, जबकि आधिकारिक तौर पर मार्ग खुला बताया जा रहा था।

चेतावनी, शर्तें और बढ़ती सख्ती

जहाज मालिकों के अनुसार, देर रात रेडियो के जरिए उन्हें चेतावनी दी गई थी कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरानी नौसेना की अनुमति जरूरी होगी। इसके बाद कई जहाजों ने जोखिम लेने के बजाय रास्ता बदलना बेहतर समझा। बाद में ईरान ने भी अपने बयान में बदलाव करते हुए साफ किया कि जलमार्ग पूरी तरह बिना शर्त खुला नहीं है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि सभी जहाजों को निर्धारित रूट का पालन करना होगा और ईरान की सैन्य इकाई की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, यह भी संकेत दिया गया कि अगर अमेरिका अपने प्रतिबंधों में ढील नहीं देता, तो इस मार्ग को फिर से बंद किया जा सकता है। इन शर्तों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे शिपिंग कंपनियां सतर्क रुख अपना रही हैं।

वैश्विक असर और आगे की अनिश्चितता

इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। होर्मुज को खोलने की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन अब फिर से अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में पूरी तरह स्थिरता नहीं आती, तब तक जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हो पाएगी। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतें बड़े पैमाने पर इसी मार्ग पर निर्भर करती हैं। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह समुद्री रास्ता वास्तव में सुरक्षित और स्थिर हो पाता है या नहीं।

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