2034 में गिरना था NASA का सैटेलाइट, लेकिन अचानक बदल गया हिसाब… आज धरती की ओर लौट रहा 600 किलो का ‘अंतरिक्ष मेहमान’

अंतरिक्ष में कई वर्षों से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का एक सैटेलाइट अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। करीब 600 किलोग्राम वजन वाला Van Allen Probe-A सैटेलाइट आज यानी 10 मार्च को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाला है। यह सैटेलाइट साल 2012 में लॉन्च किया गया था और इसे पृथ्वी के चारों ओर मौजूद रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। इस मिशन का उद्देश्य यह समझना था कि अंतरिक्ष में मौजूद खतरनाक ऊर्जा कण और सौर गतिविधियां पृथ्वी और उसके आसपास के वातावरण को कैसे प्रभावित करती हैं। लगभग सात साल तक सक्रिय रूप से काम करने के बाद इस मिशन को 2019 में बंद कर दिया गया था, लेकिन सैटेलाइट अब तक पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा था। अब धीरे-धीरे इसकी कक्षा कमजोर होने लगी और यह धरती के वायुमंडल की ओर खिंचने लगा है, जिससे इसका सफर खत्म होने वाला है।

2034 तक रहने की उम्मीद थी, लेकिन सूरज की गतिविधि ने बदल दिया खेल

वैज्ञानिकों का शुरुआती अनुमान था कि यह सैटेलाइट 2034 तक पृथ्वी की कक्षा में बना रहेगा, लेकिन अंतरिक्ष के हालात अचानक बदल गए। हाल के वर्षों में सूरज की गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में सोलर मैक्सिमम कहा जाता है। जब सूरज ज्यादा सक्रिय होता है तो उसकी ऊर्जा और विकिरण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को गर्म कर देते हैं, जिससे वायुमंडल का फैलाव बढ़ जाता है। इसी वजह से पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे पुराने सैटेलाइट्स पर ज्यादा घर्षण पड़ने लगता है। यही कारण है कि Van Allen Probe-A धीरे-धीरे अपनी ऊंचाई खोता गया और अनुमान से कई साल पहले ही धरती की ओर आने लगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया प्राकृतिक है और कई पुराने सैटेलाइट्स के साथ ऐसा हो चुका है। NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस सैटेलाइट की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं ताकि इसके पृथ्वी में प्रवेश के समय और स्थान का सही अनुमान लगाया जा सके।

क्या लोगों के लिए कोई खतरा है? वैज्ञानिकों ने बताया सच

जब भी कोई सैटेलाइट पृथ्वी की ओर गिरने की खबर आती है तो लोगों के मन में चिंता बढ़ जाती है कि कहीं वह किसी आबादी वाले इलाके में तो नहीं गिरेगा। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार इस सैटेलाइट से लोगों को खतरा बहुत कम है। जैसे ही कोई सैटेलाइट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, वहां मौजूद तेज घर्षण और अत्यधिक तापमान के कारण उसका अधिकांश हिस्सा जलकर राख हो जाता है। अनुमान है कि इस सैटेलाइट के ज्यादातर हिस्से वायुमंडल में ही खत्म हो जाएंगे। अगर कोई छोटा टुकड़ा बचता भी है तो उसके समुद्र में गिरने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि पृथ्वी की लगभग 70 प्रतिशत सतह पानी से ढकी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी इंसान के इस मलबे से प्रभावित होने की संभावना बेहद कम होती है और ऐसी घटनाएं बहुत दुर्लभ होती हैं। इसलिए आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

पृथ्वी की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी दी इस मिशन ने

Van Allen Probe मिशन को अंतरिक्ष अनुसंधान के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। इस मिशन के जरिए वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के चारों ओर मौजूद रेडिएशन बेल्ट यानी ऊर्जा कणों की परतों के बारे में कई नई जानकारियां हासिल कीं। ये बेल्ट पृथ्वी को सूरज से आने वाले खतरनाक विकिरण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मिशन के दौरान मिले डेटा से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि सौर तूफान और स्पेस वेदर का असर सैटेलाइट, अंतरिक्ष यात्रियों और धरती की तकनीकी प्रणालियों पर कैसे पड़ सकता है। इन जानकारियों का इस्तेमाल भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को सुरक्षित बनाने में किया जा रहा है। भले ही यह सैटेलाइट अब अपना सफर खत्म करने वाला है, लेकिन इसके जरिए मिली वैज्ञानिक जानकारी आने वाले कई वर्षों तक अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोगी साबित होती रहेगी।

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