रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद OTT से गायब हुई दिलजीत दोसांझ की ‘Satluj’, आखिर क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?

पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपनी फिल्म ‘Satluj’ को लेकर सुर्खियों में हैं। लंबे इंतजार के बाद यह फिल्म 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फैसले ने दर्शकों को हैरान कर दिया है। फिल्म को बिना किसी बड़े प्रमोशन के सीधे ओटीटी पर रिलीज किया गया था, इसलिए कई लोगों को इसकी रिलीज की जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में अचानक फिल्म का हट जाना सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गया। हालांकि, प्लेटफॉर्म की ओर से संकेत दिए गए हैं कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म को दोबारा स्ट्रीम करने की कोशिश की जाएगी।

थिएटर रिलीज से लेकर टाइटल बदलने तक

‘सतलुज’ का सफर शुरुआत से ही आसान नहीं रहा। इस फिल्म का मूल नाम ‘पंजाब 95’ रखा गया था और इसे पहले सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी। लेकिन सेंसर बोर्ड की ओर से कई बदलाव और कट लगाने की बात सामने आने के बाद फिल्म लंबे समय तक प्रमाणन की प्रक्रिया में अटकी रही। बाद में इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया और इसे सीधे ओटीटी पर रिलीज किया गया। फिल्म के विषय को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसकी कहानी पंजाब के उस दौर पर आधारित है जब कथित फर्जी एनकाउंटर और मानवाधिकार से जुड़े कई गंभीर सवाल उठे थे। यही वजह है कि फिल्म लगातार विवादों में बनी रही।

फिल्म हटने पर दिलजीत का रिएक्शन वायरल

फिल्म के ओटीटी से हटने के बाद दिलजीत दोसांझ का रिएक्शन भी तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर फिल्म का एक दृश्य साझा करते हुए दर्शकों से इसे जल्द देखने की अपील की। उन्होंने लिखा कि यह आधुनिक दौर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है और खास तौर पर अभिनेता सविंदर पाल विक्की के अभिनय की जमकर तारीफ की। इसके साथ ही उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह कहते नजर आए कि अगर फिल्म हटा भी दी गई है तो उन्हें इसकी ज्यादा चिंता नहीं है। उनका कहना था कि कई लोगों ने फिल्म पहले ही डाउनलोड कर ली है और अब वह इस मामले को लेकर तनाव में नहीं हैं। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता की कहानी पर आधारित है फिल्म

‘सतलुज’ एक क्राइम-बायोग्राफिकल फिल्म है, जिसमें मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष को दिखाया गया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मुख्य भूमिका निभाई है और उनके किरदार के जरिए उस दौर की घटनाओं को सामने लाने की कोशिश की गई है। कहानी 1980 और 1990 के दशक के पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां कथित फर्जी एनकाउंटर और लापता लोगों के मामलों को उठाया गया है। फिल्म का विषय गंभीर होने के कारण यह लगातार चर्चा में बनी हुई है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म दोबारा ओटीटी पर लौटती है या नहीं। फिलहाल ‘सतलुज’ का हटना और दिलजीत का बयान दोनों ही मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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