Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री थलापति विजय के एक फैसले के बाद बड़ा विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने फिल्म निर्माता के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है। यह पद एक साल के लिए दिया गया है और इसे मंत्री स्तर की जिम्मेदारी माना जाता है। सरकार का कहना है कि इस नियुक्ति का मकसद केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। लेकिन जैसे ही यह फैसला सामने आया, विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
कौन हैं के. वेंकट नारायण?
के. वेंकट नारायण एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और कानून की पढ़ाई कर चुके व्यक्ति हैं। वह बेंगलुरु की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी केवीएन प्रोडक्शंस के मालिक हैं। इसी कंपनी ने मुख्यमंत्री विजय की फिल्म ‘जननायकन’ बनाई है। इसी वजह से विपक्ष का कहना है कि उन्हें यह जिम्मेदारी उनकी योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक और फिल्मी रिश्तों की वजह से दी गई है। यह बात अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है।
विपक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल
भाजपा, द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने इस फैसले की आलोचना की है। भाजपा का कहना है कि जिस व्यक्ति को तमिल भाषा और संस्कृति की पूरी जानकारी नहीं है, वह दिल्ली में तमिलनाडु का सही प्रतिनिधित्व कैसे करेगा। वहीं DMK ने कहा कि कर्नाटक से जुड़े व्यक्ति से तमिलनाडु के बड़े मुद्दों की रक्षा की उम्मीद करना सही नहीं है। AIADMK ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला राज्य के हितों के खिलाफ जा सकता है।
आगे बढ़ा राजनीतिक विवाद
इस मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। फिलहाल सरकार की तरफ से विपक्ष के आरोपों पर कोई बड़ा जवाब नहीं दिया गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस फैसले को कैसे सही ठहराती है और नया प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाता है।








