“मैं भी बंगाल की बेटी हूं… फिर मुझे यहां आने की अनुमति क्यों नहीं?” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की टिप्पणी से मचा सियासी तूफान

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई जिसने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने मंच से ही इस बात पर हैरानी जताई कि उन्हें तय स्थान पर कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि वह खुद को “बंगाल की बेटी” मानती हैं, फिर भी उन्हें यहां आने के लिए अनुमति न मिलना आश्चर्यजनक है। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई और इस मुद्दे पर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी शुरू हो गई।

राष्ट्रपति शनिवार को दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं। इस सम्मेलन में देश-विदेश से संथाल समुदाय के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विद्वान शामिल हुए। मूल योजना के अनुसार राष्ट्रपति को सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करना था, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से वहां अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम का स्थान बदलकर बागडोगरा के गोशाईपुर कर दिया गया। कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद राष्ट्रपति ने सम्मेलन को संबोधित किया और बाद में वह मूल स्थल बिधाननगर भी पहुंचीं, जहां उन्होंने लोगों से बातचीत करते हुए अपनी बात रखी।

“ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं” – राष्ट्रपति की टिप्पणी चर्चा में

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक भावुक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस कार्यक्रम में मौजूद होंगी। राष्ट्रपति ने कहा, “मैं बंगाल की बेटी हूं। मुझे लगा कि यहां के कार्यक्रम में मुझे आने से कोई रोक नहीं होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं, शायद वह मुझसे नाराज हों, मुझे ठीक से पता नहीं।” हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें इस बात को लेकर कोई गुस्सा या व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है।

राष्ट्रपति के इस बयान को कई लोग एक सौम्य लेकिन महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। आमतौर पर राष्ट्रपति पद को पूरी तरह गैर-राजनीतिक माना जाता है और सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी कम ही देखने को मिलती है। इसलिए उनकी यह बात तुरंत चर्चा का विषय बन गई। स्थानीय लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि तय कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपति के कार्यक्रम को अनुमति नहीं मिल सकी और उसे अचानक दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा।

बीजेपी ने ममता सरकार पर साधा निशाना

राष्ट्रपति की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर सीधे निशाना साधा। बीजेपी नेता और पार्टी के पश्चिम बंगाल सह-प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उनके मुताबिक, भारत के राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और तैयारियों की कमी बेहद चिंताजनक है।

अमित मालवीय ने कहा कि जब किसी राज्य की सरकार राष्ट्रपति के कार्यक्रम के प्रति भी उदासीनता दिखाती है, तो यह प्रशासनिक विफलता के साथ-साथ संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी को भी दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि संस्थागत सम्मान की कमी को भी दिखाती है। बीजेपी नेताओं ने इस मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगने की बात भी कही है।

संथाल इतिहास और संस्कृति पर राष्ट्रपति का जोर

राजनीतिक विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मेलन में संथाल समुदाय के इतिहास और गौरवशाली परंपरा पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि संथाल समाज ने भारत के इतिहास में संघर्ष और साहस की कई मिसालें पेश की हैं। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग 240 साल पहले संथाल समुदाय के महान योद्धा तिलका मांझी ने शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनके बाद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे वीरों ने 1855 के प्रसिद्ध संथाल हुल आंदोलन का नेतृत्व किया था।

राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समाज की भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 संथाल समुदाय के इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उसी साल संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। इसके अलावा हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि में लिखा गया भारतीय संविधान भी जारी किया गया था। राष्ट्रपति ने इसे सांस्कृतिक सम्मान और पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

राष्ट्रपति के इस पूरे दौरे और उनके बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ विपक्ष राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और बयानबाजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर कार्यक्रम स्थल बदलने की असली वजह क्या थी।

Read More-26 लाख सालाना की नौकरी ठुकराकर चौंका दिया सबको! जॉइनिंग से ठीक पहले युवक ने लिया ऐसा फैसला, वजह जानकर लोग रह गए हैरान

 

 

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img