बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने एक बार फिर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनका दावा है कि कांग्रेस पार्टी के कई सोशल मीडिया अकाउंट भारत में नहीं, बल्कि विदेशों में ऑपरेट हो रहे हैं। पात्रा के अनुसार, एक्स (पूर्व ट्विटर) के एक फीचर के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है कि कुछ कांग्रेस नेताओं, पार्टी से जुड़े संगठनों और समर्थक इन्फ्लुएंसर्स की लोकेशन भारत में नहीं दिखाई देती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन अकाउंट्स के जरिए “भारत विरोधी नैरेटिव” चलाया जा रहा है और देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने की कोशिश की जा रही है।
पात्रा का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि एक संगठित प्रयास हो सकता है, जिसकी जांच जरूरी है।
विदेशी इन्फ्लुएंसर्स पर निशाना
संबित पात्रा ने अपने बयान में कहा कि सिर्फ कांग्रेस से जुड़े अकाउंट ही नहीं, बल्कि कई लेफ्ट और विपक्ष समर्थक इन्फ्लुएंसर्स भी विदेश में बैठे हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और साउथ ईस्ट एशिया के विभिन्न हिस्सों में बैठे लोग भारत की राजनीति को प्रभावित करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। पात्रा के अनुसार, सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाने से लेकर सरकार के खिलाफ नैरेटिव बनाने तक, सब कुछ एक प्रकार की “डिजिटल रणनीति” के तहत किया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की जांच सिर्फ राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जरूरी है।
कांग्रेस का पलटवार और सफाई
दूसरी ओर कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी हर बार चुनावी माहौल में इसी तरह के राजनीतिक आरोप लगाती है ताकि असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली लोकेशन कई बार VPN, ऐप सेटिंग्स और तकनीकी कारणों से बदल जाती है, इसलिए किसी भी पार्टी या नेता पर “विदेश से अकाउंट चलाने” का आरोप लगाना गलत है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि बीजेपी को अगर कोई ठोस सबूत है तो उसे सरकार और जांच एजेंसियों के सामने रखना चाहिए, न कि मीडिया के जरिए राजनीतिक संदेश देना चाहिए।
सोशल मीडिया पर तेज बहस
इस आरोप के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। बीजेपी समर्थक जहां पात्रा के बयान को गंभीर सुरक्षा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं विपक्ष समर्थक इसे “राजनीतिक नाटक” करार दे रहे हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया अकाउंट्स की लोकेशन हमेशा वास्तविक नहीं होती, इसलिए सिर्फ लोकेशन के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं।
फिर भी, इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया का प्रभाव कितना बढ़ चुका है और विदेशी तत्व किस हद तक भारत की डिजिटल राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। यह मामला आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अब इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना चुके हैं।
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