‘जिन्हें दिक्कत है वे ईरान चले जाएं!’ CO कुलदीप कुमार के बयान पर AIMIM ने जताई नाराजगी, बोले ‘ये सड़क छाप गुंडे जैसी…’

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अलविदा जुमे की नमाज से पहले आयोजित शांति समिति की बैठक के दौरान पुलिस अधिकारी की एक चेतावनी अब बड़े विवाद का कारण बन गई है। संभल के सर्किल ऑफिसर (CO) कुलदीप कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कानून व्यवस्था को लेकर लोगों को सख्त संदेश देते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। कुछ नेताओं ने इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश बताया, तो वहीं कुछ ने इसे आपत्तिजनक भाषा करार दिया। इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।

AIMIM ने जताई नाराजगी, बयान को बताया आपत्तिजनक

इस मामले पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को जनता से बात करते समय मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। उनका आरोप है कि जिस तरह की भाषा वीडियो में सुनाई दे रही है, वह एक जिम्मेदार अधिकारी के पद के अनुरूप नहीं है। AIMIM नेताओं ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए लोगों की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अधिकारियों को संयमित बयान देने की सलाह दे। पार्टी के नेताओं का कहना है कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए संवाद जरूरी है, न कि विवाद पैदा करने वाले बयान।

कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी जताई आपत्ति

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को जनता से इस तरह की भाषा में बात नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार प्रशासन का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन इसके लिए संवाद का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। प्रतापगढ़ी ने कहा कि अगर प्रशासन शांति चाहता है तो उसे लोगों के साथ सम्मानजनक तरीके से बातचीत करनी चाहिए। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग प्रशासन की सख्ती को सही ठहरा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे अनावश्यक विवाद बता रहे हैं।

प्रशासन का कहना—शांति व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता

वहीं स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अलविदा जुमे और ईद जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर कानून व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। अधिकारियों के मुताबिक, शांति समिति की बैठकों का उद्देश्य यही होता है कि सभी समुदायों के लोग मिलकर शांति और सौहार्द बनाए रखें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की अफवाह या विवाद से बचने के लिए लोगों से सहयोग की अपील की गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में शांति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि प्रशासन लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील कर रहा है।

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