Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। रसुवा जिले के आसपास आई इस बाढ़ ने नेपाल और चीन सीमा क्षेत्र में भी भारी नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी भयानक बाढ़ अचानक कैसे आई?
इस बीच चीन की ओर से दिए गए बयान ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। चीन ने दावा किया है कि नेपाल में आए भूकंप के कारण ग्लेशियर में हलचल हुई, जिससे बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और इसके बाद भूस्खलन के कारण बाढ़ की स्थिति बनी। चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने इस हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि चीन नेपाल के साथ खड़ा है और राहत कार्यों में सहयोग करेगा।
चीन ने भूकंप को बताया वजह, नेपाल के साथ मदद का किया वादा
चीनी पक्ष के अनुसार, घटना से पहले नेपाल क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके बाद हिमस्खलन हुआ और पहाड़ी इलाकों में बड़े स्तर पर मलबा जमा हो गया। चीन का कहना है कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन की यह प्रक्रिया सीधे तौर पर भूकंप से जुड़ी हुई थी।
चीनी राजदूत ने कहा कि इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चीन हालात पर नजर बनाए हुए है और नेपाल के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रहा है। हालांकि, वैज्ञानिकों की शुरुआती जांच में इस दावे को लेकर अलग जानकारी सामने आई है।
अमेरिकी सर्वे में सामने आई अलग कहानी, ग्लेशियर टूटने को बताया मुख्य कारण
अमेरिकी वैज्ञानिक सर्वे के शुरुआती विश्लेषण में इस बाढ़ की वजह भूकंप नहीं बल्कि ग्लेशियर के टूटने की घटना बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लैंगटांग लिरुंग पर्वत के उत्तरी हिस्से में करीब 5200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला भाग टूट गया था।
ग्लेशियर का यह हिस्सा लगभग 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा, जिससे भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नदी में पहुंच गया। इस मलबे ने लेंडे खोला नदी का रास्ता रोक दिया और वहां एक अस्थायी बांध जैसी स्थिति बन गई। बाद में जब यह अवरोध टूटा तो पानी, कीचड़ और पत्थरों का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ गया और बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया।
ग्लेशियर आपदा से बनी बाढ़ ने सीमा क्षेत्र में मचाई तबाही
लेंडे खोला नदी तिब्बत क्षेत्र से निकलती है और नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी में मिलती है। ग्लेशियर टूटने से इस नदी में अचानक पानी का दबाव बढ़ गया, जिससे रसुवागढ़ी और तिमुरे जैसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं। हालांकि, इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक जांच जरूरी है। फिलहाल नेपाल की इस बाढ़ को लेकर चीन का भूकंप वाला दावा और विशेषज्ञों की ग्लेशियर टूटने वाली रिपोर्ट के बीच बहस जारी है।
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