US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है। खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप के रुख में नरमी आई है और दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को टालने के लिए सीजफायर को दो हफ्ते और बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ गया था, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब बातचीत के संकेत मिलने से हालात में कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
मध्यस्थता और बातचीत से बढ़ी उम्मीदें
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ देशों की कोशिशें तेज हो गई हैं। हाल ही में पाकिस्तान में हुई बातचीत के बाद अब यह संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष फिर से वार्ता के लिए तैयार हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर यह बैठक होती है तो तीन अहम मुद्दों पर चर्चा होगी—पहला ईरान का परमाणु कार्यक्रम, दूसरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य गतिविधियां और तीसरा संभावित नुकसान की भरपाई। इन मुद्दों पर सहमति बनने से क्षेत्र में स्थिरता लौटने की संभावना बढ़ सकती है।
ट्रंप के बयान से बदला माहौल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए अपने बयान में संकेत दिया था कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका इस समय पीछे हटता है तो ईरान को दोबारा मजबूत होने में लंबा समय लग सकता है। इसके साथ ही अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने भी दावा किया कि नाकेबंदी के शुरुआती 24 घंटों में ईरान के तटीय क्षेत्रों से होने वाली आवाजाही को प्रभावी तरीके से रोका गया। इन बयानों के बीच अब कूटनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिशों ने माहौल को थोड़ा बदल दिया है।
चीन और वैश्विक समीकरण भी अहम
इस पूरे घटनाक्रम में वैश्विक ताकतों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। ट्रंप ने हाल ही में शी जिनपिंग को पत्र लिखकर ईरान को हथियार न देने की अपील की थी। इसके जवाब में चीन की ओर से भी आश्वासन दिया गया कि वह इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका, ईरान और अन्य प्रमुख देश आपसी समझ से आगे बढ़ते हैं, तो क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा तनाव कम हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह संभावित सीजफायर विस्तार एक स्थायी शांति की ओर कदम साबित होगा या नहीं।








