सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पानी में एक सफेद रंग का केमिकल मिलाकर नकली दूध तैयार किया जा रहा है। वीडियो देखने के बाद कई लोग खाने-पीने की चीजों में मिलावट को लेकर चिंता जता रहे हैं। हालांकि, यह साफ नहीं है कि वीडियो कब और कहां का है। साथ ही, इसमें किए गए दावों की किसी सरकारी एजेंसी या जांच में पुष्टि भी नहीं हुई है। इसलिए वीडियो में दिखाई गई बातों को फिलहाल सत्य नहीं माना जा सकता।
वीडियो में क्या दिखाया गया है?
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति के हाथ में सफेद रंग के तरल पदार्थ से भरी एक बोतल दिखाई देती है। वह इस तरल को आधी बाल्टी पानी में डालता है। कुछ ही सेकंड में पानी का रंग दूध जैसा सफेद हो जाता है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति दावा करता है कि इसी तरह नकली दूध तैयार किया जाता है और बाद में इसे मशीन में डालकर बेचा जाता है। वह यह भी कहता है कि कुछ ही मिनटों में बड़ी मात्रा में दूध तैयार हो गया। वीडियो में दिखाई गई बातें लोगों को चौंका रही हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उसमें इस्तेमाल किया गया पदार्थ क्या था और उसका असली उद्देश्य क्या था।
सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और संबंधित विभागों से मामले की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि अगर वीडियो सही है तो यह लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों ने वीडियो के दावे पर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रहा सफेद तरल दूध बनाने वाला केमिकल नहीं, बल्कि मशीनों में इस्तेमाल होने वाला कूलेंट या कटिंग ऑयल भी हो सकता है, जो पानी में मिलकर दूध जैसा रंग बना देता है। ऐसे लोगों ने बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की सलाह दी।
बिना पुष्टि वाले वीडियो पर भरोसा करने से बचें
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर वीडियो को सच मान लेना सही नहीं होता। किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी होती है। अगर किसी को खाने-पीने की चीजों में मिलावट का शक हो, तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग या FSSAI को देनी चाहिए, ताकि जांच की जा सके। फिलहाल इस वायरल वीडियो की सच्चाई सामने नहीं आई है। ऐसे में लोगों को अफवाह फैलाने से बचना चाहिए और केवल प्रमाणित जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए।
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