4 साल का इंतजार खत्म! यूपी को मिला नया DG, लेकिन क्या जल्द ही बदल जाएगी तस्वीर?

उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पुलिस महानिदेशक (DG) की नियुक्ति को हरी झंडी मिल गई है। 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एल.वी. एंटनी देव कुमार को इस अहम पद पर प्रमोट किया गया है। उनके नाम को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी मिल चुकी है और यह प्रमोशन 1 मार्च 2026 से प्रभावी माना जाएगा। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनकी तैनाती से संबंधित अलग आदेश जल्द जारी किया जाएगा। इस फैसले के साथ ही प्रदेश में पिछले चार वर्षों से चल रही अस्थायी व्यवस्था पर विराम लग गया है।

चार साल बाद स्थायी DG, खत्म हुई कार्यवाहक व्यवस्था

प्रदेश में साल 2022 से पुलिस प्रमुख का पद कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रहा था, जिससे सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इससे पहले राजीव कृष्ण इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे, जिन्होंने प्रशांत कुमार के रिटायरमेंट के बाद यह पद संभाला था। अब एल.वी. एंटनी देव कुमार की नियुक्ति के साथ ही सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में पंचायत चुनाव और कई विधानसभा उपचुनाव होने वाले हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बनने वाला है।

कौन हैं एल.वी. एंटनी देव कुमार? जानिए प्रोफाइल

एल.वी. एंटनी देव कुमार 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और मूल रूप से तमिलनाडु के तिरुनेलवेली से आते हैं। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान और इतिहास में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की है। अपने लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, जिनमें सीबीसीआईडी, एसएसएफ और पर्सनल विभाग शामिल हैं। हाल ही में वह एडीजी रूल्स एंड मैनुअल के पद पर तैनात थे। प्रशासनिक अनुभव और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले देव कुमार को कानून-व्यवस्था के मामलों में कुशल अधिकारी माना जाता है।

कार्यकाल पर सस्पेंस, क्या मिलेगा सेवा विस्तार?

हालांकि देव कुमार की नियुक्ति से प्रदेश में प्रशासनिक स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन उनके कार्यकाल को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं। उनकी सेवा आयु 28 मई 2026 को पूरी हो रही है, यानी उनके पास बहुत सीमित समय है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार उन्हें सेवा विस्तार देती है या नहीं। फिलहाल इस नियुक्ति ने प्रदेश पुलिस में नेतृत्व को लेकर चल रही अनिश्चितता को खत्म कर दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में उनकी कार्यशैली और फैसले ही तय करेंगे कि यह बदलाव कितना प्रभावी साबित होता है।

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