Prayagraj News: प्रयागराज में गंगा नदी के तेज कटान ने मचान वाले बाबा के वर्षों पुराने आशियाने को छीन लिया। नदी की बीच धारा में बनी बजरंगदास उर्फ मचान वाले बाबा की कुटिया शुक्रवार देर शाम ढहकर गंगा में समा गई। राहत की बात यह रही कि खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने सुबह ही बाबा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। इससे एक बड़ा हादसा टल गया। कुटिया गिरने की खबर सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा होने लगी। गंगा की तेज धारा और लगातार बदलते प्रवाह के कारण कुटिया की जमीन कमजोर हो गई थी। आखिरकार कटान इतना बढ़ गया कि वर्षों से खड़ी यह संरचना टिक नहीं सकी।
गंगा के बीचोंबीच बनाया था आशियाना
बजरंगदास को लोग मचान वाले बाबा के नाम से जानते हैं। उन्होंने गंगा नदी की बीच धारा में मचान बनाकर अपनी कुटिया तैयार की थी और कई वर्षों से वहीं रह रहे थे। नदी के बीच उनका यह अनोखा आशियाना स्थानीय लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता था। लोग कुटिया के बारे में जानने और उसे देखने के लिए उत्सुक रहते थे। लेकिन गंगा की धारा में बदलाव और आसपास की जमीन के लगातार कटने से कुटिया पर खतरा बढ़ता गया। पानी के बहाव ने उसके आधार को कमजोर कर दिया था। ऐसे में कुटिया के गिरने की आशंका लगातार बढ़ रही थी। शुक्रवार को यही आशंका सच साबित हुई और बाबा का पुराना आशियाना नदी में समा गया।
सुबह प्रशासन ने सुरक्षित निकाला
कुटिया के आसपास तेजी से हो रहे कटान को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाया। अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह ही बजरंगदास को वहां से सुरक्षित निकाल लिया था। इसके बाद भी गंगा की धारा का दबाव कम नहीं हुआ और कटान जारी रहा। शाम होते-होते कुटिया का आधार पूरी तरह कमजोर पड़ गया और वह ढह गई। देखते ही देखते बाबा की वर्षों की रहने की जगह गंगा में समा गई। समय रहते उन्हें बाहर निकाल लेने के कारण इस घटना में जनहानि होने से बच गई। हालांकि, कुटिया गिरने से उनका पुराना आशियाना खत्म हो गया। यह घटना दिखाती है कि नदी के तेज कटान वाले क्षेत्रों में खतरे को समय रहते पहचानना और सुरक्षित स्थान पर पहुंचना कितना जरूरी है।
गंगा के कटान ने बढ़ाई चिंता
मचान वाले बाबा की कुटिया ढहने की घटना ने गंगा के तेज कटान से पैदा होने वाले खतरों की ओर फिर ध्यान खींचा है। नदी का बहाव बदलने और जमीन कटने से नदी के आसपास मौजूद संरचनाओं तथा लोगों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी और समय पर चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल, बाबा को सुरक्षित निकाल लिया जाना राहत की बात है, लेकिन उनका वर्षों पुराना आशियाना अब नहीं रहा। घटना के बाद नदी के कटान वाले इलाकों में सावधानी बरतने की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। स्थानीय स्तर पर आगे की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी होगा, ताकि किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे खतरे का सामना न करना पड़े।
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