राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विरोध प्रदर्शन कर राहुल गांधी के बयान पर नाराजगी जताई। देहरादून, हल्द्वानी, पिथौरागढ़ और टिहरी समेत कई स्थानों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और पूर्व सैनिकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की गई और कुछ जगहों पर उनके पुतले भी जलाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम करने वाले लोगों के बारे में सार्वजनिक बयान देते समय शब्दों और तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड में राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है।
राहुल गांधी के बयान से कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर जारी राहुल गांधी के एक बयान से जुड़ी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए उन्हें राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में खलनायक बताया था। इस टिप्पणी के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों को राजनीतिक विवाद में घसीट रहे हैं। इसके बाद अजीत डोभाल के समर्थन में बीजेपी के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ ने विरोध दर्ज कराने का फैसला किया। हालांकि, इस विवाद को समझने के लिए राहुल गांधी के बयान का पूरा संदर्भ और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं देखना भी जरूरी है।
हल्द्वानी से पिथौरागढ़ तक पूर्व सैनिकों ने जताया विरोध
15 अक्टूबर को उत्तराखंड के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। हल्द्वानी में बीजेपी सैनिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक और सेवानिवृत्त कर्नल जगत सिंह जंतवाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा और तथ्यों की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। वहीं, देहरादून में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं और पूर्व सैनिकों ने विरोध प्रदर्शन किया। पिथौरागढ़ के सिल्थाम तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अजीत डोभाल का उत्तराखंड से जुड़ाव है और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुए इन प्रदर्शनों से स्पष्ट हुआ कि इस बयान को लेकर बीजेपी का पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है।
सैनिकों के सम्मान और राजनीतिक बयानबाजी पर छिड़ी बहस
इस मामले में पूर्व सैनिकों का मुख्य जोर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल पर है। उनका कहना है कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को लेकर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बीजेपी के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ ने कांग्रेस से भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की है। दूसरी ओर, इस राजनीतिक विवाद का आकलन करते समय बयान के मूल संदर्भ और सभी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखना जरूरी है। फिलहाल उत्तराखंड में राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर विरोध प्रदर्शन चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस की ओर से इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में आगे भी चर्चा का विषय बना रहता है।
Read more-क्या तिरंगा रैली से पहले हिरासत में लिए जाएंगे अभिजीत दीपके? घर के बाहर पुलिस तैनात








