Dhirendra Pratap Singh Murder: महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और भाजपा नेता धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या की जांच में अब जमीन विवाद का एंगल भी सामने आया है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या उन्नाव के बांगरमऊ में कथित जमीन कब्जे के खिलाफ उनकी शिकायत और हत्या के बीच कोई संबंध था। जांच में यह भी सामने आया है कि साजिश में शामिल बताए जा रहे लोगों को कथित तौर पर प्लॉट, दुकान और लाखों रुपये देने का लालच दिया गया था। हालांकि, इस लालच के पीछे कौन था और हत्या की साजिश किसने रची, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
जमीन कब्जे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे धीरेन्द्र
धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री को एक शिकायती पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने उन्नाव के बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में जमीन पर कथित अवैध कब्जे और भू-माफियाओं की गतिविधियों का मुद्दा उठाया था। शिकायत में उन्होंने तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया था। उन्होंने गाटा संख्या 488 और 487 का जिक्र करते हुए जमीन की जांच कराने और उसे कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। इसके साथ ही तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, सब-रजिस्ट्रार और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई थी। धीरेन्द्र ने कथित तौर पर भू-माफियाओं और तहसील प्रशासन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस शिकायत के बाद किन लोगों से उनका विवाद या दुश्मनी बढ़ी थी।
हत्या की साजिश में प्लॉट और पैसों का लालच?
जांच के दौरान पुलिस को हत्या की साजिश से जुड़ा एक अहम एंगल मिला है। आरोप है कि हत्याकांड में शामिल लोगों को प्लॉट, दुकान और लाखों रुपये देने का लालच दिया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह लालच किसने दिया था और इसके पीछे असल में कौन लोग थे। इसके अलावा कथित तौर पर तय रकम कितनी थी और हत्या की योजना बनाने में कितने लोग शामिल थे, इसकी भी जांच चल रही है। जमीन विवाद और आर्थिक लालच के बीच कनेक्शन की पुष्टि करना पुलिस के लिए इस मामले में अहम कड़ी बन गया है।
अपहरण के बाद बेहोश कर मारी गई गोली
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, धीरेन्द्र प्रताप सिंह को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके से कथित तौर पर अगवा किया गया था। आरोप है कि उन्हें चलती गाड़ी में किसी नशीले पदार्थ की मदद से बेहोश किया गया। इसके बाद उन्हें गोली मार दी गई। करीब तीन दिन तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। रविवार शाम उनका शव दुबग्गा इलाके में सराय प्रेमराज गांव के पास किसान पथ के नजदीक शारदा सहायक नहर से बरामद हुआ। पुलिस को शव की जांच के दौरान सिर के पिछले हिस्से और दाहिने सीने में गोली लगने के निशान मिले थे। इसके बाद मामला हत्या की जांच में बदल गया और पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी।
नवंबर 2024 की शिकायत फिर बनी जांच का हिस्सा
धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या के बाद मुख्यमंत्री को भेजा गया उनका पुराना शिकायती पत्र भी पुलिस की जांच के दायरे में आ गया है। बताया गया है कि उन्होंने 13 नवंबर 2024 को एसडीएम बांगरमऊ और 16 नवंबर को जिलाधिकारी उन्नाव को जमीन से जुड़े मामले की जानकारी दी थी। शिकायत में तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर कथित कब्जे और प्लॉटिंग का मुद्दा उठाया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत के बाद किन लोगों को इससे नुकसान हो सकता था और क्या उसी वजह से कोई रंजिश पैदा हुई थी। फिलहाल प्लॉट, दुकान और पैसों के लालच से लेकर पुराने जमीन विवाद तक कई बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ रही है। हत्या की असली वजह और साजिश के पीछे मौजूद लोगों की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
Read More-कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत की हुंकार, कहा- ‘अगर हिंदू जागा तो…’







