कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत की हुंकार, कहा- ‘अगर हिंदू जागा तो…’

RSS Chief Mohan Bhagwat Toronto Speech: कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु- दोस्ती में दुनिया को अपनाएं’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की संस्कृति, विविधता और सेवा की भावना पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में अलग-अलग धर्म, भाषाओं और संस्कृतियों को विरोधी नहीं माना जाता, बल्कि विविधता को समाज की ताकत समझा जाता है। कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

‘हिंदू जागेगा तो विश्व जागेगा’, भागवत का बड़ा संदेश

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की परंपरा जरूरत के समय दूसरों की मदद करने की रही है। जब दुनिया के किसी हिस्से में संकट आया और भारत से सहयोग मांगा गया, तो देश ने अपनी क्षमता के अनुसार मदद की। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर भारत ने बिना किसी मांग के भी सहायता का हाथ बढ़ाया है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के जागरूक होने का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। कार्यक्रम का आयोजन ‘कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग’ यानी CHORD की ओर से किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय समुदाय के सदस्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई।

विविधता को भारत की ताकत बताया

RSS प्रमुख ने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषा, धर्म, जाति और परंपराएं होने के बावजूद इन्हें समाज को बांटने वाली चीज नहीं माना गया। भारतीय सोच में विविधता के भीतर भी एकता देखने की परंपरा रही है। उन्होंने इंसान और प्रकृति के बीच संबंध का भी जिक्र किया। भागवत के मुताबिक, भारतीय संस्कृति मनुष्य को प्रकृति से अलग नहीं देखती, बल्कि दोनों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानती है। उन्होंने कहा कि लोगों के बाहरी रूप और जीवनशैली अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत के स्तर पर सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

वसुधैव कुटुंबकम से लेकर भारत की सेवा भावना तक

मोहन भागवत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया को एक परिवार की तरह देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज की भलाई केवल व्यक्ति की तरक्की से नहीं हो सकती। जब कोई व्यक्ति आगे बढ़े तो उसका फायदा परिवार, समाज और देश के साथ पूरी मानवता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने भारत के विकास को भी इसी सोच से जोड़ते हुए कहा कि देश की तरक्की केवल आर्थिक या राजनीतिक ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भारत की प्रगति का उद्देश्य मानवता की सेवा भी होना चाहिए। उन्होंने पुराने समय में भारत से ज्ञान और विचारों के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचने का उदाहरण दिया।

जेसन केनी के बयान पर लगे ‘मोदी-मोदी’ के नारे

कार्यक्रम में कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी शामिल हुए। उन्होंने भारत और कनाडा के रिश्तों में आए बदलावों पर बात की। केनी ने दोनों देशों के संबंधों में नई गति आने की बात कही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 में कनाडा दौरे की संभावना का उल्लेख किया। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए। इससे वहां भारतीय समुदाय के बीच प्रधानमंत्री मोदी को लेकर उत्साह देखने को मिला। भागवत का यह दौरा भारतीय संस्कृति, सेवा और प्रवासी भारतीयों के साथ सामाजिक जुड़ाव के मुद्दे पर केंद्रित रहा।

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