गुरुवार को वाराणसी के अस्सी घाट स्थित सुमेरु पीठ में दर्जनों संतों ने एकजुट होकर ‘आई लव महादेव’ पोस्टर के साथ शंखनाद किया। उन्होंने “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ एक नई मुहिम की शुरुआत की, जो हाल ही में कुछ जगहों पर निकाले गए ‘आई लव मोहम्मद’ जुलूस के जवाब में बताई जा रही है। संतों ने दावा किया कि यह कदम उन गतिविधियों के विरुद्ध है, जिनके पीछे विदेशी फंडिंग के जरिए देश को अस्थिर करने की साजिशें छिपी हैं।
काशी की सड़कों पर दिखा धर्म और संस्कृति का संगम
इस मुहिम के तहत संतों ने ‘आई लव महादेव’ के पोस्टर वाराणसी की प्रमुख गलियों, मंदिरों और चौराहों पर लगाए। पोस्टर पर महादेव की तस्वीर के साथ धार्मिक संदेश भी दिए गए हैं, जिनमें सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील शामिल है। इस पहल को सोशल मीडिया पर भी खूब समर्थन मिल रहा है और इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे धर्म और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के रूप में देख रहे हैं।
संतों का आरोप – धार्मिक भावनाओं के साथ हो रही छेड़छाड़
संत समाज ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि देश विरोधी मानसिकता का विरोध करना है। उनका कहना है कि देश की संस्कृति को विभाजित करने की कोशिशें हो रही हैं, और इस पर जवाब देना आवश्यक हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन को शांति और संयम के साथ आगे बढ़ाया जाएगा ताकि भारत की सांस्कृतिक एकता बनी रहे।
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