पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता एन. बीरेन सिंह ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज पर भी सवाल खड़े किए हैं। बीरेन सिंह का दावा है कि राज्य की जनता उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को जनता का खोया हुआ विश्वास वापस हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उनके इन बयानों के बाद मणिपुर बीजेपी के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बीरेन सिंह का दावा- मुझे हटाने के लिए पार्टी के भीतर रची गई साजिश
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने एक इंटरव्यू में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि साल 2017 से ही उनके साथ पार्टी के अंदर अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आरोप दिल्ली में बैठे बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व पर नहीं, बल्कि राज्य के कुछ नेताओं पर है। बीरेन सिंह के मुताबिक, पार्टी के कुछ विधायक यह स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि कांग्रेस से बीजेपी में आने के बाद उन्हें दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका कैसे मिल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर उनके खिलाफ राजनीतिक योजना बनाई और आखिरकार उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीरेन सिंह ने यह भी कहा कि कुछ नेता बीजेपी को अपनी निजी संपत्ति की तरह देखते हैं। फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री पद से उनके हटने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। फिलहाल सरकार की कमान वाई. खेमचंद सिंह के हाथों में है। बीरेन सिंह का आरोप है कि मौजूदा मुख्यमंत्री भी उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी क्यों नहीं रुकी हिंसा?
बीरेन सिंह ने मणिपुर में जारी जातीय तनाव और हिंसा को लेकर मौजूदा सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि जब उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, तब यह उम्मीद जताई जा रही थी कि राज्य में हालात सुधरेंगे और अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव कम होगा। लेकिन उनके मुताबिक, ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हिंसा की वजह उनका नेतृत्व था, तो उनके पद छोड़ने के बाद भी घटनाएं क्यों जारी रहीं? उन्होंने नागा और कुकी समुदायों से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगा। बीरेन सिंह ने कहा कि पहले उन पर बहुसंख्यक समुदाय का पक्ष लेने के आरोप लगाए जाते थे, लेकिन अब अलग-अलग ईसाई समुदायों के बीच भी तनाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने यूरोपियन पार्लियामेंट के रवैये पर भी नाराजगी जताई। गौरतलब है कि जुलाई 2023 में यूरोपीय संसद ने मणिपुर में जातीय हिंसा को लेकर चिंता जताते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, हिंसा रोकने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
खेमचंद सरकार के कामकाज पर उठाए सवाल, इन मुद्दों पर मांगा जवाब
बीरेन सिंह मौजूदा बीजेपी सरकार की कार्यशैली से भी संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि पार्टी को उन मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए, जिनके आधार पर उसने जनता के सामने अपना राजनीतिक एजेंडा रखा था। उनके अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान और अफीम की खेती रोकने के प्रयास पहले की तरह प्रभावी दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से इन अभियानों को दोबारा गति देने की जरूरत बताई। इसके अलावा उन्होंने संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया जारी रखने की बात कही। बीरेन सिंह का कहना है कि यदि ऐसे लोगों को तुरंत देश से बाहर भेजना संभव नहीं है, तो कम से कम उनकी पहचान करके उन्हें निर्धारित शिविरों में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने जैसे मुद्दों को भी अहम बताया। बीरेन सिंह ने चिंता जताई कि यदि बीजेपी सरकार इन मुद्दों पर समय रहते काम नहीं करती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने साफ कहा कि जनता का भरोसा जीतना इस समय पार्टी की सबसे बड़ी जरूरत है।
क्या फिर मुख्यमंत्री बनेंगे बीरेन सिंह? जनता की मांग का किया दावा
अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर बीरेन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने का फैसला केवल उनकी इच्छा से नहीं होगा। इसके लिए चुनाव में पार्टी को बहुमत हासिल करना जरूरी है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि राज्य के लोग उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व मणिपुर की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए हस्तक्षेप करेगा और पार्टी के भीतर चल रही समस्याओं का समाधान निकालेगा। बीरेन सिंह के मुताबिक, बीजेपी को चुनाव से पहले जनता के बीच जाकर अपने कामों और योजनाओं की जानकारी देनी चाहिए। सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ की पहचान और नशे के खिलाफ अभियान जैसे विषयों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उनके ताजा बयानों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मणिपुर बीजेपी में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है? फिलहाल बीरेन सिंह के आरोपों और मौजूदा सरकार पर उठाए गए सवालों के बीच पार्टी की अगली राजनीतिक रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।








