ईरान संकट के बीच कतर क्यों पहुंचे एस. जयशंकर? इसके बाद अमेरिका दौरे का भी बड़ा प्लान, जानिए क्या है पूरी रणनीति

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) ने अपने खाड़ी देशों के दौरे की शुरुआत कतर से की है। इस दौरान उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और भारत-कतर संबंधों को मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं और कई देशों के बीच नए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ऐसे में भारत भी क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करने में जुटा है।

पश्चिम एशिया के हालात और भारतीयों की सुरक्षा पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हाल के तनाव और उसके असर पर भी विस्तार से बातचीत की। विदेश मंत्री जयशंकर ने कतर में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके बेहतर सहयोग के लिए कतर सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं व सुझावों को सुना। जयशंकर ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भारतीय समुदाय की मेहनत और योगदान की भी सराहना की।

चार खाड़ी देशों के बाद अमेरिका और यूरोप का दौरा

कतर के बाद एस. जयशंकर बहरीन, कुवैत और ओमान का भी दौरा करेंगे। इन देशों में वह अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद 13 जुलाई को जयशंकर अमेरिका के न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह 14 और 15 जुलाई को बेल्जियम के ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे।

भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर दुनिया की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में बदलते हालात के बीच भारत अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। कतर, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ भारत के ऊर्जा और व्यापारिक संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और भविष्य की रणनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है। अमेरिका और यूरोप के आगामी दौरे के साथ भारत वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत करने की तैयारी में है।

Read More-क्या खत्म होने वाला है फुटबॉल का सबसे सुनहरा दौर? रोनाल्डो ने वर्ल्ड कप के बीच कर दिया बड़ा ऐलान

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img