14 साल बाद कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री, PM मोदी संग क्या होने वाली है बड़ी डील?

Marco Rubio India Visit: अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio चार दिवसीय भारत दौरे पर पहुंच चुके हैं और इस यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। रुबियो ऐसे समय भारत आए हैं जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर दुनिया की बड़ी ताकतें नई रणनीति पर काम कर रही हैं। उनके दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 26 मई को होने वाली क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में सुरक्षा, समुद्री सहयोग, टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। रुबियो की यह पहली भारत यात्रा है और इसे दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाला दौरा माना जा रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस यात्रा को “ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण” बताया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच कई बड़े समझौते देखने को मिल सकते हैं।

PM मोदी से मुलाकात में होगी खास चर्चा

नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री की मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से होने वाली है। इस बैठक को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में काफी हलचल है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान व्यापार, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हो सकती है। खासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि अमेरिका भारत को स्वच्छ ऊर्जा और गैस सप्लाई के क्षेत्र में नए प्रस्ताव दे सकता है। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग और सैन्य साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। भारत और अमेरिका पहले ही रक्षा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में लगातार करीब आ रहे हैं और अब ऊर्जा सुरक्षा को भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा बनाया जा सकता है।

14 साल बाद कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री

मार्को रुबियो का कोलकाता दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। पिछले 14 वर्षों में यह पहला मौका है जब अमेरिका का कोई विदेश मंत्री कोलकाता पहुंचा है। इससे पहले मई 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री Hillary Clinton ने इस शहर का दौरा किया था। कोलकाता पहुंचने के बाद रुबियो के कार्यक्रम में मध्य कोलकाता स्थित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुख्यालय ‘मदर हाउस’ का दौरा भी शामिल है। यहां वह सेंट टेरेसा की विरासत को करीब से देख सकते हैं। इस यात्रा को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। रुबियो का यह कदम भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई अहम स्थानों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका भारत के साथ सिर्फ रणनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

आगरा-जयपुर से दिल्ली तक व्यस्त रहेगा कार्यक्रम

भारत दौरे के दौरान मार्को रुबियो केवल नई दिल्ली और कोलकाता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वह आगरा और जयपुर का भी दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि इन शहरों की यात्रा के जरिए अमेरिका भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत को करीब से समझने की कोशिश करेगा। हालांकि इस पूरे दौरे का सबसे अहम केंद्र क्वाड देशों की बैठक ही मानी जा रही है। इस बैठक में जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी हिस्सा लेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत, समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और नई टेक्नोलॉजी पर साझा रणनीति बनाना इस बैठक का प्रमुख एजेंडा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, क्वाड अब केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे में रुबियो की भारत यात्रा को अमेरिका की नई एशिया रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस दौरे से जुड़े कई बड़े ऐलान सामने आ सकते हैं, जिन पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

Read More-पाकिस्तान पर RSS की नई सोच? बातचीत वाले बयान के बाद सामने आई बड़ी बात, कहा- ‘एक दिन लौटेंगे अपनी जड़ों की…’

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img