मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। अजयगढ़ थाना क्षेत्र के बिहारपुरवा गांव में निर्माणाधीन कुएं की खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना अचानक हुआ कि मजदूरों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में पूरा कुआं अंदर की तरफ भरभराकर गिर पड़ा और मौके पर चीख-पुकार मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे और अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिया। बाद में प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंची। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस हादसे में पांच मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
एक ही परिवार के थे कई मजदूर, गांव में पसरा मातम
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान चुन्नू यादव, रामपाल यादव, राजुमार यादव, आशीष यादव और चुनवाद पाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि इनमें से कई मजदूर एक ही परिवार से जुड़े हुए थे और लंबे समय से कुएं की खुदाई का काम कर रहे थे। ग्रामीणों के मुताबिक यह कुआं काफी गहरा हो चुका था और अंदर की मिट्टी पहले से कमजोर थी। बावजूद इसके काम जारी रखा गया। हादसे के बाद परिवारों में कोहराम मच गया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि मजदूरों को बचाने के लिए गांव वालों ने बिना समय गंवाए खुदाई शुरू कर दी थी, लेकिन भारी मिट्टी और गहराई की वजह से राहत कार्य मुश्किल हो गया। बाद में प्रशासन की टीम पहुंची और करीब दो घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा रही और हर कोई मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अंत में सभी की मौत की खबर ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों ने स्थानीय प्रधान और जिम्मेदार लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार के एक सदस्य ने कहा कि जिस जगह कुएं की खुदाई हो रही थी, वहां पहले से मिट्टी कट चुकी थी और जमीन कमजोर थी। इसके बावजूद वहां दोबारा काम शुरू कराया गया। उनका आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई और मजदूरों की जान जोखिम में डाल दी गई। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद काफी देर तक कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची और गांव वाले ही अपने दम पर मलबा हटाने की कोशिश करते रहे। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे की गंभीरता देखकर सरपंच मौके से चले गए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई जा रही है। हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
प्रशासन पर उठे सवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज
इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर बिना पर्याप्त तकनीकी जांच और सुरक्षा इंतजामों के कुएं, बोरिंग या अन्य निर्माण कार्य कराए जाते हैं, जिससे मजदूरों की जान खतरे में पड़ जाती है। पन्ना की इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते निर्माण स्थल की जांच की जाती और सुरक्षा मानकों का पालन कराया जाता तो शायद इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी इस हादसे की जानकारी पहुंचने की बात कही जा रही है। गांव के लोग अब पीड़ित परिवारों को न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।
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