उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने शहर की यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पिता की आंखों के सामने उसका 22 वर्षीय इकलौता बेटा जिंदगी की जंग हार गया। मृतक की पहचान प्रांशु सचान के रूप में हुई है, जो साल 2025 में पुलिस विभाग में सिपाही बने थे। उनकी तैनाती अंबेडकरनगर जिले की डांडा कोतवाली में थी। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को प्रांशु सरकारी काम निपटाकर फतेहपुर जा रहे थे। रास्ते में उनके पिता प्रमोद सचान भी मिल गए और वह उन्हें बाइक पर बैठाकर आगे बढ़े। इसी दौरान फतेहपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में बक्सर मोड़ के पास पीछे से आए तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में प्रांशु गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि पिता को मामूली चोट आई।
डॉक्टरों ने कानपुर किया रेफर, एंबुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा प्रांशु
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायल प्रांशु को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। उनकी गंभीर हालत देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद एंबुलेंस से उन्हें अस्पताल ले जाया जाने लगा। एंबुलेंस में पिता प्रमोद सचान भी मौजूद थे। उन्हें उम्मीद थी कि समय रहते अस्पताल पहुंचने पर बेटे की जान बच जाएगी। लेकिन कानपुर पहुंचने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। टाटमिल चौराहे और आसपास के इलाकों में राजनीतिक रैली के कारण भारी जाम लगा हुआ था। आरोप है कि इसी जाम में एंबुलेंस लंबे समय तक फंसी रही और प्रांशु को समय पर इलाज नहीं मिल सका।
डेढ़ घंटे तक हाथ जोड़ते रहे पिता, लेकिन नहीं मिला रास्ता
बताया जा रहा है कि टाटमिल चौराहे पर एंबुलेंस करीब एक घंटे तक फंसी रही। इस दौरान प्रांशु खून से लथपथ हालत में दर्द से तड़प रहे थे। पिता कभी उनके घावों से निकल रहे खून को रोकने की कोशिश करते तो कभी एंबुलेंस से बाहर निकलकर लोगों और ट्रैफिक पुलिस से रास्ता देने की गुहार लगाते। वह हर गुजरते पल के साथ अपने बेटे की जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे थे। ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी एंबुलेंस को निकलवाने का प्रयास किया, लेकिन वाहनों की लंबी कतार के कारण रास्ता साफ नहीं हो सका। करीब डेढ़ से दो घंटे की मशक्कत के बाद एंबुलेंस हैलट अस्पताल पहुंची। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद प्रांशु को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही पिता बदहवास हो गए।
गांव में होगी अंतिम विदाई, रैली और ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रांशु की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। गुरुवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन उनका पार्थिव शरीर लेकर पैतृक गांव मोतीपुर रवाना हुए। बताया गया है कि गांव में पुलिस विभाग की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर वीआईपी मूवमेंट और राजनीतिक रैलियों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क पर किसी की जिंदगी दांव पर लगी हो, तब एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं हो पाती? एक पिता की आंखों के सामने बेटे की मौत का यह मामला पूरे प्रदेश को झकझोर रहा है।
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