उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक महिला को अपने पति पर तेजाब से हमला करने के मामले में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला पिछले साल सामने आया था और तब से लगातार चर्चा में रहा। जानकारी के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। परिवार में तनाव बढ़ने के बाद मामला इतना गंभीर हो गया कि एक दिन पति पर तेजाब से हमला कर दिया गया। घटना के बाद पीड़ित को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और सबूत जुटाने के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश किया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी महिला को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई है।
सोते समय हुआ हमला, गंभीर रूप से झुलस गया पति
जांच में सामने आया कि घटना उस समय हुई जब पीड़ित अपने घर में सो रहा था। आरोप है कि महिला ने उस पर तेजाब डाल दिया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया। हमले के बाद उसने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। परिवार के लोगों और आसपास के लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने लंबे समय तक उसका इलाज किया। इस हमले का असर उसकी जिंदगी पर गहरा पड़ा और उसे शारीरिक रूप से काफी नुकसान झेलना पड़ा। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया, जिनके आधार पर मामला अदालत में आगे बढ़ा।
सुनवाई के दौरान कई अहम तथ्य आए सामने
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई गवाह और सबूत पेश किए। जांच एजेंसियों ने घटना से जुड़े तथ्यों को विस्तार से रखा। अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का अध्ययन किया। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पति-पत्नी के बीच संबंध काफी समय से खराब थे और दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर महिला को दोषी माना। न्यायालय ने कहा कि तेजाब से हमला बेहद गंभीर अपराध है, जिसका असर पीड़ित के पूरे जीवन पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद अदालत ने आरोपी महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे अपराध समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं, इसलिए इनके खिलाफ सख्त संदेश जाना जरूरी है। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने राहत जताई और कहा कि उन्हें न्याय मिला है। वहीं यह मामला एक बार फिर इस बात की चर्चा का विषय बन गया है कि घरेलू विवादों का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। कानून ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता है और अदालत का यह फैसला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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