दतिया में पलट गया चुनावी खेल! कांग्रेस ने मारी बाजी, जानिए कितने वोटों से बीजेपी को मिली हार

मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली। मतगणना के सभी 15 राउंड पूरे होने के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल देखने को मिला, जबकि बीजेपी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इस जीत को कांग्रेस आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी अहम मान रही है।

दतिया की जनता ने किसे दिया भरोसा?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को कुल 66,757 वोट मिले। इनमें 66,726 वोट ईवीएम से और 31 वोट पोस्टल बैलेट के जरिए प्राप्त हुए। दूसरी ओर बीजेपी के आशुतोष तिवारी को कुल 60,741 मत मिले, जिनमें 60,701 ईवीएम और 40 पोस्टल बैलेट वोट शामिल रहे। दोनों उम्मीदवारों के बीच 6,016 वोटों का अंतर रहा, जिसने कांग्रेस को स्पष्ट जीत दिलाई। इस चुनाव में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार दामोदर यादव तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें कुल 22,527 वोट मिले, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय जरूर दिखाई दिया, लेकिन जीत कांग्रेस के खाते में गई।

वोट शेयर ने भी दिखाया मुकाबले का पूरा चित्र

मत प्रतिशत की बात करें तो कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को कुल 42.39 प्रतिशत वोट मिले। वहीं बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 38.57 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। दोनों दलों के बीच वोट शेयर का अंतर भी साफ दिखाई दिया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस उपचुनाव में कुल 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। चुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रहा। 30 जुलाई को हुए मतदान के बाद आए नतीजों ने साफ कर दिया कि दतिया की जनता ने इस बार कांग्रेस के पक्ष में फैसला सुनाया।

जीत के बाद कांग्रेस का हमला, जानिए क्यों हुआ था उपचुनाव

कांग्रेस की जीत के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उनका कहना था कि दतिया की जनता ने भ्रष्टाचार, अहंकार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ अपना स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस जीत को लोकतंत्र और जनता के विश्वास की जीत बताया। दूसरी ओर यह उपचुनाव इसलिए कराया गया था क्योंकि कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। उन्हें दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी से जुड़े मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई थी, जिसके बाद यह सीट रिक्त हो गई। इसी कारण निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव कराया, जिसमें कांग्रेस ने एक बार फिर इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए जीत दर्ज कर ली। दतिया का यह परिणाम अब मध्यप्रदेश की राजनीति में आगे होने वाले चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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