भारतीय वायुसेना का स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL Tejas एक बार फिर हादसे का शिकार हो गया। जानकारी के अनुसार 7 फरवरी को नियमित प्रशिक्षण उड़ान के बाद यह विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना पाकिस्तान सीमा के पास स्थित गुजरात के नलिया एयरबेस के आसपास बताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि विमान उड़ा रहे पायलट ने समय रहते खुद को इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बाहर निकल आए। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया है कि लैंडिंग के अंतिम चरण में विमान के सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी महसूस हुई, जिसके बाद नियंत्रण में दिक्कत आई और विमान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन वायुसेना के सूत्रों ने पुष्टि की है कि हादसा ट्रेनिंग सॉर्टी के दौरान हुआ और पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं। विमान का ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है और विशेषज्ञों की टीम नुकसान का आकलन कर रही है।
तकनीकी खराबी की आशंका, बेड़े की जांच शुरू
हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने एहतियातन पूरे तेजस बेड़े की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जांच में किसी सिस्टम फेल्योर की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगी। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आधुनिक फाइटर जेट में सेंसर, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और इंजन के बीच तालमेल बेहद अहम होता है। यदि इनमें से किसी एक में भी गड़बड़ी आती है तो लैंडिंग के समय खतरा बढ़ जाता है। तेजस को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित हल्के लड़ाकू विमान के रूप में विकसित किया गया है, और इसे भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किया गया है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता जरूर बढ़ाती हैं, लेकिन वायुसेना का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद सख्त हैं और हर घटना की गहराई से जांच की जाती है। इसी के तहत अब सभी तेजस विमानों की उड़ान रिकॉर्डिंग, इंजन डेटा और मेंटेनेंस लॉग की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
एमके-1ए प्रोग्राम में देरी के बीच बढ़ी चिंता
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब तेजस एमके-1ए कार्यक्रम पहले से ही देरी का सामना कर रहा है। भारतीय वायुसेना ने कुल 180 एमके-1ए लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है, लेकिन डिलीवरी में लगभग दो साल की देरी बताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजस भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का अहम हिस्सा है और इसका सफल संचालन बेहद जरूरी है। एमके-1ए वर्जन में बेहतर रडार, आधुनिक एवियोनिक्स और उन्नत हथियार प्रणाली शामिल की गई है। हालांकि उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण इसकी समयसीमा प्रभावित हुई है। ऐसे में हालिया दुर्घटना ने एक बार फिर कार्यक्रम की विश्वसनीयता और तकनीकी मजबूती को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी नए प्लेटफॉर्म के शुरुआती वर्षों में तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन जरूरी है कि उन्हें समय रहते ठीक किया जाए और पारदर्शिता बरती जाए। वायुसेना फिलहाल जांच पूरी होने तक आधिकारिक टिप्पणी से बच रही है।
हाल के वर्षों में तीसरी बड़ी दुर्घटना
पिछले कुछ वर्षों में यह तेजस की तीसरी बड़ी दुर्घटना मानी जा रही है। मार्च 2024 में राजस्थान के जैसलमेर में एक तेजस विमान क्रैश हुआ था, जिसमें पायलट सुरक्षित बच गए थे। वहीं 2025 में दुबई एयरशो के दौरान एक और हादसा हुआ था, जिसमें पायलट की जान चली गई थी और जांच अभी भी जारी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने रक्षा क्षेत्र में बहस को तेज कर दिया है कि क्या तेजस कार्यक्रम को और मजबूत तकनीकी निगरानी की जरूरत है। हालांकि वायुसेना और रक्षा मंत्रालय का रुख साफ है कि हर दुर्घटना से सबक लिया जाता है और सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जाता है। फिलहाल नलिया एयरबेस के पास हुए इस ताजा हादसे की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जो फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल करेगी। जब तक अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक हादसे की असली वजह स्पष्ट नहीं हो पाएगी, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने एक बार फिर स्वदेशी तेजस फाइटर जेट की विश्वसनीयता पर चर्चा छेड़ दी है।
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