SIR विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम घटनाक्रम सामने आया है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं से जुड़े मामले में अदालत ने नोटिस जारी किया है। साथ ही, कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन करने और वहां मार्च निकालने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए गए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत याचिका पर विचार कर रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित लोगों के आचरण को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने व्यवहार के बारे में भी जवाब देना होगा। इस मामले में अदालत का रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विवाद चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ न्यायपालिका की गरिमा से भी जुड़ गया है।
‘हमें कोई धमका नहीं सकता’, सुनवाई के दौरान CJI ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के मार्च और समर्थकों की नारेबाजी से सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश हुई। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को कोई धमका नहीं सकता और न्यायपालिका देश में हो रही घटनाओं से अनजान नहीं है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि अदालत के बाहर दिए जाने वाले बयानों और कोर्ट के भीतर अपनाए जाने वाले रुख में अंतर दिखाई देता है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जारी नोटिस राजनीतिक प्रदर्शन के लिए न्यायालय परिसर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग से संबंधित है, न कि अवमानना की कार्रवाई के लिए। याचिका में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा और कांग्रेस से जुड़े पक्षों को शामिल किया गया है।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
मामले की सुनवाई में केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ नेताओं की टिप्पणियों का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश के प्रति अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, विपक्षी नेताओं के मार्च के दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की का मुद्दा भी अदालत में रखा गया। याचिकाकर्ता के वकील ने घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। अदालत ने प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और नेताओं के मार्च से संबंधित फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। कोर्ट का अंतिम रुख यह तय करने में अहम होगा कि न्यायालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर क्या नियम लागू किए जाने चाहिए।
Read More-अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश! भारत ने जताई नाराजगी, MEA ने क्या कहा?








