भारतीय राजनीति के गलियारों से इस वक्त एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस की सर्वोच्च नेता सोनिया गांधी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक ऐसा ऐतिहासिक ऑफर दिया है, जो अगर सच साबित हुआ तो देश की राजनीति की दिशा और दशा हमेशा के लिए बदल जाएगी। खबर है कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को फोन कर टीएमसी का कांग्रेस में विलय करने का बड़ा प्रस्ताव दिया है। इसके बदले में ममता बनर्जी को कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाने की बात कही जा रही है। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज नहीं किया है, बल्कि सूत्रों के मुताबिक उन्होंने इस पर अंतिम फैसला लेने के लिए कांग्रेस नेतृत्व से कुछ दिनों का समय मांगा है।
10 जनपथ पर डेढ़ घंटे की गोपनीय मुलाकात: राहुल और अभिषेक के बीच क्या पक रही है खिचड़ी?
सोनिया गांधी के इस कथित ऑफर की खबरों के बीच दिल्ली का सियासी पारा उस वक्त और बढ़ गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच एक बेहद गोपनीय और लंबी बैठक हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली के 10 जनपथ पर दोनों युवा नेताओं के बीच यह मुलाकात करीब डेढ़ घंटे तक चली। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात बेहद सकारात्मक और फायदेमंद रही है। इस बैठक में मौजूदा राष्ट्रीय राजनीतिक हालातों, विपक्षी एकजुटता और हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद पैदा हुई परिस्थितियों पर बेहद बारीकी से चर्चा की गई। कयास लगाए जा रहे हैं कि सोनिया गांधी के ऑफर को जमीन पर उतारने और इसके तौर-तरीकों को तय करने की जिम्मेदारी अब राहुल और अभिषेक के कंधों पर आ गई है, जिसके चलते इस मैराथन बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
बीजेपी का डर या अंदरूनी कलह? आखिर क्यों मजबूर हुईं ममता बनर्जी!
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की इनसाइड स्टोरी भी अब धीरे-धीरे छनकर सामने आने लगी है। सूत्रों का दावा है कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को समझाते हुए कहा है कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार क्षेत्रीय दलों को निशाना बना रही है और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियों को परेशान कर रही है, वैसी ही स्थिति आने वाले समय में टीएमसी के साथ भी हो सकती है। बीजेपी के इस चौतरफा राजनीतिक और कानूनी हमलों से बचने का एकमात्र रास्ता यही है कि सभी ताकतें एक छतरी के नीचे आ जाएं। इसके अलावा, खबरों में यह भी दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के भीतर भी इस वक्त अंदरूनी खींचतान चरम पर है और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद और उनकी कार्यशैली के खिलाफ हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखना और अभिषेक के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसके कारण वे कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
11 जून को कांग्रेस की महाबैठक: क्या होने वाला है कोई बहुत बड़ा आधिकारिक ऐलान?
ममता बनर्जी को दिए गए इस महा-ऑफर और राहुल-अभिषेक की मुलाकात के तुरंत बाद कांग्रेस मुख्यालय में भी हलचलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आनन-फानन में एक बड़ी बैठक का ऐलान कर दिया है। 11 जून को दिल्ली के इंदिरा भवन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सभी महासचिवों, राज्य प्रभारियों और सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की एक आपात बैठक बुलाई गई है। इस बेहद महत्वपूर्ण मीटिंग की अध्यक्षता खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बैठक को संगठन की मजबूती और आगामी रणनीतियों पर चर्चा के लिए बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बैठक का सीधा कनेक्शन टीएमसी के साथ चल रही इस ‘सीक्रेट डील’ से है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 11 जून की इस बैठक में कांग्रेस अपने शीर्ष नेताओं को इस संभावित विलय या बड़े गठबंधन को लेकर भरोसे में ले सकती है। अब देखना यह होगा कि आने वाले कुछ दिनों में ममता बनर्जी क्या फैसला लेती हैं और भारतीय राजनीति में कौन सा नया भूचाल आता है।







