मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए भारतीय रेलवे की खुलकर सराहना की है। उन्होंने बताया कि वह लद्दाख लौटने के लिए ट्रेन से सफर कर रहे हैं और दिल्ली से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन में यात्रा करने का उनका अनुभव बेहद शानदार रहा। वांगचुक ने कहा कि उन्हें भारतीय रेलवे पर गर्व है। खास तौर पर उन्होंने चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल को देखने की इच्छा जताई और कहा कि यह देश की इंजीनियरिंग क्षमता का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां भारत को नई पहचान देती हैं।
परीक्षा सुधार कानून पर जताई खुशी
वीडियो में सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने संसद में परीक्षा सुधार से जुड़े नए विधेयक का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सुधार केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है। उनके अनुसार, देश के युवाओं को बेहतर और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य मजबूत बन सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े और प्रभावी सुधार करेगी।
सरकार से पुराने वादे निभाने की अपील
सोनम वांगचुक ने अपने बयान में सरकार से यह भी अपील की कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों को लेकर जो आश्वासन दिए गए थे, उनका पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि पहले उनके साथ और बाद में सीजेपी नेताओं के साथ जो समझौते हुए थे, उनमें यह भरोसा दिया गया था कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने सरकार से इस वादे पर कायम रहने की अपील करते हुए कहा कि इससे छात्रों के बीच विश्वास का माहौल बनेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी।
लद्दाख लौटते समय दिया युवाओं के नाम संदेश
सोनम वांगचुक ने कहा कि अब वह अपने घर लद्दाख लौट रहे हैं। उन्होंने देश के युवाओं से सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील की और कहा कि सरकार और युवाओं के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत होना चाहिए। उनके अनुसार, जब युवा और सरकार मिलकर काम करेंगे, तभी देश का विकास तेज होगा और भारत एक मजबूत राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ेगा। गौरतलब है कि हाल ही में वांगचुक ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। इसके बाद सरकार के साथ बातचीत हुई और आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। अब उनके इस नए बयान को सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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