अर्थव्यवस्था पर बरसे तेजस्वी: जीडीपी के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर RJD नेता का तीखा हमला

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने देश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी के दावों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो बयान जारी करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर आड़े हाथों लिया और कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकार बनावटी और कागजी आंकड़ों की दुनिया से बाहर निकलकर देश की असली जमीनी तस्वीर को देखे। उनके मुताबिक, विकास का ढोल केवल विज्ञापनों और सुर्खियों में अच्छा लगता है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

पड़ोसी देशों से तुलना और आर्थिक बदहाली

तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जिस जीडीपी ग्रोथ का लगातार दावा कर रहे हैं, वह आम आदमी की जिंदगी, उनकी जेब और रसोई में बिल्कुल नजर नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के कई पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका प्रति व्यक्ति आय के मामले में आज भारत से आगे निकल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने गिरते रुपये, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और पिछले 50 वर्षों के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुकी बेरोजगारी का जिक्र करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।

घरेलू कर्ज और छोटे व्यापारों की स्थिति

आरजेडी नेता ने देश के आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं, जिसके कारण लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी चलाने के लिए घरेलू कर्ज और ईएमआई का सहारा लेना पड़ रहा है। छोटे व्यापार और व्यापारी वर्ग आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं, और देश के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी जवानी खपाने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश के 85 करोड़ लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले 5 किलो मुफ्त अनाज पर निर्भर रहना पड़े, तो ऐसे में विकास के दावे महज एक छलावा साबित होते हैं।

शिक्षा व्यवस्था और भविष्य का संकट

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए तेजस्वी यादव ने देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का भी पर्दाफाश किया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में आज करीब 8.70 करोड़ युवा ऐसे हैं जो किसी भी तरह की पढ़ाई या कौशल विकास से नहीं जुड़े हैं। पिछले एक दशक में लगभग 94 हजार स्कूलों का बंद होना और हजारों स्कूलों का केवल एक शिक्षक के भरोसे चलना इस देश के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब जुमलों और झूठे वादों की राजनीति को छोड़कर जमीन पर काम करने का समय आ गया है।

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